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क्यों होती है कुत्तों की पूजा
कुकर का मतलब होता है कुत्ता. कुत्तों की यम देव का मैसेंजर यानी संदेशवाहक माना जाता है. मान्यता है कि महाभारत काल में भी युधिष्ठिर के साथ कुत्ते ने स्वर्ग लोक की यात्रा की थी. कुत्ता पूरे जीवन वफादारी के साथ इंसान की रक्षा करते हैं और मरने के बाद भी वह अपने मालिक का ख्याल रखते हैं.क्या होता है खास
खास बात यह है कि नेपाल की तरह डोरंडा में रहने वाले रांची के नेपाली समाज के लोगों के यहां भी यह दिवाली यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि पांच दिन चलती है. इस दौरान लोग कुत्तों की पूजा किया करते हैं. फूलों की माला पहनाई जाती है और तिलक भी लगाया जाता है. उनके लिए स्वादिष्ट पकवान भी बनाए जाते हैं. कुत्तों को दही का सेवन कराया जाता है. साथ ही अंडा और दूध खाने के लिए दिए जाते हैं. लोग ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उनकी कामना होती है कि कुत्ते हमेशा उनके साथ बने रहें.क्रूरता के खिलाफ यह त्योहार देता है एक खास संदेश
दुनिया भर में जानवरों के खिलाफ हो रही क्रूरता के खिलाफ यह त्योहार एक खास संदेश देता है. एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट के सोमेन मजूमदार का कहना है कि कुत्ते सबसे वफादार और प्यारा जानवर है. इनसे प्यार और अपनापन के साथ रहना चाहिए. यहीं कारण है कि इस पूजा को हम कई सालों से करते आ रहे हैं. इसे भी पढ़ें – हाईकोर्ट">https://lagatar.in/svanidhi-scheme-will-start-for-high-court-lawyers-will-affect-clients-pocket/">हाईकोर्टके वकीलों के लिए शुरू होगी स्वनिधि योजना, क्लाइंट की जेब पर पड़ेगा असर [wpse_comments_template]

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