Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं सदन के सामने रखीं.
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026 का बजट ऐतिहासिक है और इन विभागों को कुल बजट का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है, जबकि केंद्र सरकार अपने स्तर पर केवल 5 से 6 प्रतिशत खर्च करती है.
मंत्री ने कहा कि राज्य का ऋण प्रबंधन संतुलित है. ब्याज का बोझ राजस्व आय के 5 प्रतिशत से कम है और कर्ज का अनुपात जीडीपी के 25.5 प्रतिशत पर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास कार्य आगे बढ़ा रही है.
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दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि 25 साल के इंतजार के बाद पेसा नियमावली को अधिसूचित कर दिया गया है. इससे राज्य के 16 जिलों के आदिवासी इलाकों में ग्रामसभा को अधिकार मिलेगा. उन्होंने कहा कि ग्रामसभा ही गांव की असली मालिक होगी और पारंपरिक ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
मंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत 12 करोड़ मानव दिवस का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 10 करोड़ मानव दिवस पूरे किए जा चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा की हजारों करोड़ रुपये की राशि केंद्र सरकार पर बकाया है, जिससे मजदूरों के भुगतान में देरी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि नाम बदलने से रोजगार की गारंटी समाप्त नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 1 लाख 90 हजार आवास पूरे किए गए हैं. इस वर्ष 6 लाख से अधिक नए आवासों पर काम शुरू किया जाएगा. इसके लिए 4100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में प्रत्येक क्षेत्र में 15 किलोमीटर सड़क और 10 करोड़ रुपये के पुल निर्माण की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा. विधायक निधि की राशि भी जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया.
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