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डिफॉल्टर प्रधान वर्ग बनता मीडिल क्लास

SURJIT SINGH मीडिल क्लास के हालात पर 4 खबरें हैं. पहली- दो पहिया वाहनों के लिए लोन लेने वाले मासिक किस्त नहीं चुका रहे हैं. डिफॉल्टर्स की संख्या तेजी से बढ़ रहा है. बैंक उनकी बाइक या स्कूटी सीज कर रहे हैं. दूसरी - सोना देकर लोन लेने वाले (गोल्ड लोन) डिफॉल्ट कर रहे हैं. अपने गहने छुड़ाने नहीं जा रहे हैं. गोल्ड लोन देने वाले बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान अब उनका सोना नीलाम कर रहे हैं. तीसरी- क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करने वाले या क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने वालों में डिफॉल्ट की संख्या तेजी से बढ़ रहा है. डिफॉल्टरों की संख्या में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चौथी - पर्सनल लोन लेने वाले डिफॉल्टरों की संख्या भी बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिफॉल्टरों की संख्या में बढ़ोतरी खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है. चारों खबरें मीडिल क्लास से जुड़े हैं. दो पहिया वाहन मीडिल क्लास ही खरीदता है. गोल्ड लोन भी मीडिल क्लास ही लेता है. इसी तरह क्रेडिट कार्ड पर या पर्सनल लोन लेने वाले भी मीडिल क्लास से ही आते हैं. पर्सनल लोन को लेकर पिछले दिनों इंडस वैली का एक आंकड़ा सामने आया था. 8 साल पहले 2017 में लोन लेने वालों की संख्या 64 लाख थी, जो वर्ष 2024 में बढ़ कर 1.38 करोड़ हो गया है. तब लोन की रकम 1.50 लाख करोड़ जो बढ़ कर 9 लाख करोड़ रुपया हो गया है. इसमें 88 प्रतिशत लोन 1.00 लाख रुपये से कम है. यानी वही मीडिल क्लास. मीडिल क्लास की यह स्थिति बताती है कि कम होती आय और बढ़ती महंगाई ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है. अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने लोन तो लिया, लेकिन अब चुका नहीं पा रहे. घर में रखा सोना तक हाथ से निकल जा रहा है. जिस स्कूटी-बाइक से काम पर निकलते थे, वह सीज होने की नौबत है. और उनकी पहचान अब डिफॉल्टर प्रधान वर्ग के रुप में होने लगी है. यह वही मीडिल क्लास है, जिसने वाट्सएप पर मिले ज्ञान को अपना अस्त्र-शस्त्र बनाया. खुद पर गर्व करते हुए राष्ट्रवादी बना फिरता रहा और अब दो-ढ़ाई हजार रुपया मासिक किस्त भी देने की स्थिति में नहीं रहा.

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