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दिल्ली HC में विवाद खत्म, Netflix बदलेगा ‘घूसखोर पंडत’ का टाइटल

तमनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडत रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर गई है. मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स ने अदालत को बताया कि फिल्म का शीर्षक बदल दिया जाएगा.
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Lagatar desk : तमनोज बाजपेयी की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडत रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर गई है. मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स ने अदालत को बताया कि फिल्म का शीर्षक बदल दिया जाएगा.

 

हाईकोर्ट में क्या हुआ

मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ के समक्ष हुई. यह याचिका फिल्म के प्रस्तावित रिलीज़ को चुनौती देते हुए दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान नेटफ्लिक्स की ओर से कहा गया कि उठी हुई आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए फिल्म का नाम घूसखोर पंडत से बदलकर ऐसा वैकल्पिक शीर्षक रखा जाएगा, जो फिल्म की कहानी और उद्देश्य को सटीक रूप से दर्शाए.

 

अदालत को यह भी बताया गया कि फिल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटा ली गई है. इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अब मामले में किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निपटारा कर दिया.

 

याचिका में क्या लगाए गए थे आरोप

यह याचिका महेंद्र चतुर्वेदी द्वारा दायर की गई थी, जो स्वयं को पेशे से आचार्य बताते हैं.याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म का शीर्षक और प्रचार सामग्री अपमानजनक, साम्प्रदायिक रूप से आपत्तिजनक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाली है.

 

याचिकाकर्ता के अनुसार

नेटफ्लिक्स ने शो घूसखोर पंडत का इस तरह प्रचार किया कि पंडत शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़ा गया.पंडत शब्द ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा है.फिल्म के शीर्षक से ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की आशंका है.

 

सामूहिक मानहानि और नियमन का मुद्दा

याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म की रिलीज़ से सामूहिक मानहानि की स्थिति उत्पन्न हो सकती है,घृणा भाषण को बढ़ावा मिल सकता है,सार्वजनिक और साम्प्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है.

 

इसके अलावा केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया कि उसने OTT प्लेटफॉर्म्स पर रचनात्मक स्वतंत्रता के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी नियामक तंत्र स्थापित नहीं किया है, जिससे व्यावसायिक लाभ के लिए समुदाय-आधारित सनसनीखेज़ी को बढ़ावा मिलता है.

 

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