New Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने आज शुक्रवार को Telegram ऐप पर केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध हटाने से इनकार कर दिया . दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस फैसले पर मुहर लगा दी, जिसमें सरकार ने RE-NEET एग्जाम के कारण टेलीग्राम(Telegram) पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया है.
भारत में RE-NEET परीक्षा 21 जून को होने जा रही है. हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, सरकार के पास पावर है. कहा कि सरकार ने प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया है.
हाई कोर्ट ने कहा है कि आदेश की सूचना नहीं दिये जाने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता हमने देखा कि केंद्र सरकार ने इस पर विधिवत विचार किया था. यह कहते हुए कोर्ट ने Telegram ऐप पर लगाया गया 5 दिवसीय प्रतिबंध को बरकरार रखा.
बता दें कि कल गुरुवार को केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर लगाये गये प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के क्रम में कई गंभीर आरोप लगाये थे.
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दावा किया था कि इस प्लेटफार्म (टेलीग्राम) का इस्तेमाल NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं के कथित प्रश्नपत्र लीक करने और प्रसारित करने में किया गया है.
सरकार ने अदालत में आरोप लगाया कि टेलीग्राम अब नया डार्क वेब बनता जा रहा है. यह विभिन्न साइबर अपराधियों सहित अन्य खतरनाक तत्वों को जोड़ने का माध्यम बन गया है.
टेलीग्राम पर पूर्व में भी कई बार पेपर लीक और फर्जी पेपर सर्कुलेट होने के आरोप लगते रहे हैं. विभिन्न रिपोर्ट्स में स्वीकार किया जा चुका है कि जालसाजी और साइबर ठगी करने वाले भी इस प्लेटफॉर्म का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते रहे हैं.
सरकार ने कोर्ट को बताया था कि टेलीग्राम प्लेटफार्म का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, उग्रवाद, आतंकवाद, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्रियों के प्रसार, साइबर ठगी और धोखाधड़ी आदि अवैध गतिविधियों में किया जा रहा है. टेलीग्राम की गोपनीयता संबंधी सुविधाएं अपराधियों सहायक बन रही हैं.
केंद्र ने कहा कि अपराधी टेलीग्राम चैनलों के माध्यम स डार्क वेब फोरमों के लिंक साझा करते हैं. अपराधी डीप वेब लिंक का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं. इस वजह से जांच एजेंसियां उनकी जल्द पहचान नहीं कर पाती.
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