NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट में आज उत्तर प्रदेश में हिंसा के आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई होगी. याचिका जमीयत उलमा-ए-हिंद ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के कार्रवाई की जा रही है. जमीयत ने बुलडोजर एक्शन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है. खबरों के अनुसार जस्टिस ए एस बोपन्ना और विक्रम नाथ की अवकाशकालीन बेंच सुनवाई करेगी. जमीयत ने कोर्ट से मांग की है कि वह यूपी सरकार को कार्रवाई रोकने का निर्देश दे.
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याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने की मांग की गयी है कि कानपुर जिले में अतिरिक्त कानूनी दंडात्मक उपाय के रूप में किसी भी आपराधिक कार्यवाही में किसी भी आरोपी की आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति के खिलाफ कोई प्रारंभिक कार्रवाई नहीं की जाये. कहा गया है कि कुछ दिन पूर्व दो राजनीतिक नेताओं द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी की गयी थी जिससे देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था. इनकी टिप्पणी के विरोध में कानपुर जिले में लोगों के एक समूह द्वारा बंद का आह्वान किया गया था. आरोप लगाया गया है कि कानपुर में हुई हिंसा के बाद मुख्यमंत्री सहित कई अधिकारियों ने मीडिया में कहा था कि संदिग्धों व आरोपी की संपत्तियों को जब्त और ध्वस्त कर दिया जायेगा.
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की न्यूज डायरी।16 June।।सोशल मीडिया पर पुलिस को चुनौती।।एयर फ्यूल टैक्स में कमी।।कहां बनेगा सचिवालय भवन।।राष्ट्रपति चुनावःदिखी विपक्षी एकता।।क्रिकेट में ईशान की लंबी छलांग।।समेत कई खबरें और वीडियो।। प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
जमीयत उलेमा ए हिंद की लीगल सेल के सचिव गुलजार अहमद आजमी के हस्ताक्षर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में तीन जून को कानपुर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया. उनकी हिंदू समुदाय के लोगों से झड़प हुई. उसके बाद दोनों समुदाय के लोगों ने पथराव किया, लेकिन उसके बाद प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की. एक वर्ग से जुड़े लोगों के मकानों पर बुलडोजर चलाये गये. याचिका में कहा गया है कि बुलडोजर कार्रवाई से पहले यूपी के मुख्यमंत्री, एडीजी और कानपुर के पुलिस कमिश्नर के बयान से साफ है कि जानबूझकर एक पक्ष को निशाना बनाया जा रहा है.
यूपी एक्ट, 1958 की धारा 10 का उल्लंघन
कहा गया कि कार्रवाई उत्तर प्रदेश (रेग्युलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन्स) एक्ट, 1958 की धारा 10 और उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1973 की धारा 27 का उल्लंघन है. इन कानूनों में किसी निर्माण पर कार्रवाई से पहले उसके मालिक को 15 दिन का नोटिस देने और संपत्ति के मालिक को कार्रवाई रुकवाने के लिए अपील करने के लिए 30 दिन का समय देने जैसे प्रावधान हैं. लेकिन यूपी में इसका पालन नहीं किया जा रहा है. [wpse_comments_template]
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