NewDelhi : केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं शहरी संभ्रांतवादी विचारों को प्रतिबिंबित करती हैं. कहा कि विवाह को मान्यता देना अनिवार्य रूप से एक विधायी कार्य है, जिस पर अदालतों को फैसला करने से बचना चाहिए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ देश में समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से वैध ठहराये जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार, 18 अप्रैल को सुनवाई करेगी.
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— ANI (@ANI) April">https://twitter.com/ANI/status/1647802319768289281?ref_src=twsrc%5Etfw">April
17, 2023
हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, यूपी के 183 एनकाउंटरों की भी पूर्व जज से जांच कराने की मांग
फैसला देश पर व्यापक प्रभाव डालेगा
CJI डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी. उच्चतम न्यायालय ने इन याचिकाओं को 13 मार्च को पांच न्यायाधीशों की इस संविधान पीठ के पास भेज दिया था और कहा था कि यह मुद्दा बुनियादी महत्व’ का है. इस मामले की सुनवाई और फैसला देश पर व्यापक प्रभाव डालेगा, क्योंकि आम नागरिक और राजनीतिक दल इस विषय पर अलग-अलग विचार रखते हैं. इसे भी पढ़ें : महाराष्ट्र">https://lagatar.in/11-people-involved-in-maharashtra-bhushan-award-function-died-due-to-heat-stroke-more-than-120-people-ill/">महाराष्ट्रभूषण अवॉर्ड फंक्शन में शामिल 11 लोगों की लू लगने से मौत, 120 से अधिक लोग बीमार
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