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JPSC आयु सीमा गणना तिथि में संशोधन की मांग, JLKM नेता ने राज्यपाल से की मुलाकात

Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा की गणना तिथि को लेकर उठे विवाद के बीच आज JLKM के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने राज्यपाल संतोष कुमार गांगवार से मुलाकात की. 

 

यह मुलाकात JPSC द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 01/2025 में निर्धारित आयु सीमा की कट-ऑफ तिथि में संशोधन की मांग को लेकर हुई.

 

देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि वर्तमान विज्ञापन में अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा की गणना तिथि 01 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है, जबकि इससे पूर्व आयोजित जेपीएससी की 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षाओं में यह तिथि 01 अगस्त 2017 रखी गई थी.

 

ऐसे में अगली परीक्षा के लिए स्वाभाविक रूप से यह तिथि 01 अगस्त 2018 होनी चाहिए थी, ताकि वर्षों से तैयारी कर रहे योग्य अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित न हों.

 

उन्होंने कहा कि झारखंड के गठन के 25 वर्षों में अब तक केवल 8 बार ही जेपीएससी परीक्षा आयोजित हो सकी है. लंबे अंतराल के बाद 2026 की संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा का विज्ञापन जारी होना अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद लेकर आया था, लेकिन आयु सीमा की गणना तिथि को 01 अगस्त 2026 निर्धारित कर 2017–2018 के बीच के लगभग 8–9 वर्षों के अंतर को समाप्त मान लिया गया, जिससे लाखों अभ्यर्थी आवेदन से वंचित हो गए हैं. इनमें वे छात्र भी शामिल हैं, जो पूर्व परीक्षाओं में इंटरव्यू तक पहुंच चुके थे.

 

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड एक विकासशील राज्य है, जहां गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी और मूलवासी परिवारों के छात्र प्रशासनिक सेवा में आने का सपना देखते हैं.

 

राज्य को ईमानदार, संवेदनशील और संघर्षशील अधिकारियों की आवश्यकता है, ताकि कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाया जा सके. इसी भावना के साथ राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की गई है.

 

उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और संबंधित लिखित आवेदन स्वीकार किया है. साथ ही जल्द ही मुख्यमंत्री को भी सभी दस्तावेजों के साथ पत्राचार किया जाएगा.

 

जेएलकेएम की मांग है कि आगामी कैबिनेट बैठक में विज्ञापन में संशोधन कर अधिकतम आयु सीमा की गणना तिथि 01 अगस्त 2018 निर्धारित की जाए.

 

देवेंद्र नाथ महतो ने अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई, लेकिन चेतावनी भी दी कि यदि विज्ञापन में संशोधन नहीं किया गया तो राज्यभर में छात्र आंदोलन किया जाएगा और झारखंड के अभ्यर्थी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे.

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