Search

 
 
 

जनगणना में सरना धर्म कोड की मांग, CM हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2027 की जनगणना में आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग की है. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सरना धर्म को अलग कोड देने का अनुरोध किया है.
 

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2027 की जनगणना में आदिवासी समाज के लिए सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग की है. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर सरना धर्म को अलग कोड देने का अनुरोध किया है.

Uploaded Image

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार जनगणना अभियान में पूरा सहयोग कर रही है और उन्होंने स्वयं स्व-गणना कर अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित की है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश के संतुलित विकास के लिए तथ्य आधारित नीति जरूरी है और इसके लिए सही आंकड़ों का संग्रह होना आवश्यक है.

 

उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान पर जोर देते हुए कहा कि इसकी अपनी अलग सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताएं हैं. आदिवासी समुदाय में प्रकृति पूजा, सरना स्थल, कुल देवता और ग्राम देवता की परंपराएं इसे अन्य धर्मों से अलग एक विशिष्ट पहचान देती हैं.

 

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में 2011 की जनगणना का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उस समय अलग कोड नहीं होने के बावजूद देश के 21 राज्यों में करीब 50 लाख लोगों ने अपने धर्म के रूप में सरना दर्ज कराया था. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का गठन भी आदिवासी पहचान के आधार पर हुआ है और यहां की नीतियां इसी सोच पर आधारित हैं.

 

संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने धारा 244, 338A, 339 और 275 का हवाला दिया. उन्होंने राष्ट्रपति को आदिवासी समाज का अभिभावक बताते हुए इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की. साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि जनगणना के दूसरे चरण के फॉर्म में सरना धर्म के लिए अलग कोड दिया जाए, ताकि आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके.

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही