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संताली की किताबें देवनागरी में नहीं, ओलचिकी में छापने की मांग, शिक्षा मंत्री से मिले रघुवर दास

Ranchi News: उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में ओलचिकी लिपि के 100 साल पूरे होने पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में अनुवादित संविधान का लोकार्पण किया था. रघुवर दास ने कहा कि 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर ओलचिकी लिपि में संदेश दिया था.
 
रघुवर दास

Ranchi News: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात की. उन्होंने संताली भाषा की किताबों और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री को देवनागरी की जगह ओलचिकी लिपि में प्रकाशित करने की मांग की. इस संबंध में उन्होंने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा.

 

रघुवर दास ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी की ओर से कई पाठ्य पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री तैयार की जा रही है. संताली भाषा की किताबों को देवनागरी लिपि में तैयार करने पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि संताली भाषा की अपनी लिपि ओलचिकी है. इसलिए संताली की किताबें और दूसरी पढ़ाई की सामग्री ओलचिकी में ही तैयार की जानी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में ओलचिकी लिपि के 100 साल पूरे होने पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि में संताली भाषा में अनुवादित संविधान का लोकार्पण किया था.

 

रघुवर दास ने कहा कि 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर ओलचिकी लिपि में संदेश दिया था. उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था.

 

उन्होंने बताया कि झारखंड के संताल बहुल क्षेत्रों में कई रेलवे स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों के नाम ओलचिकी लिपि में लिखे गए हैं. साहित्य अकादमी पुरस्कार भी संताली भाषा में ओलचिकी लिपि के साथ दिया जा रहा है. केंद्र सरकार के कई विभागों की वेबसाइट पर भी संताली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का इस्तेमाल किया जाता है.

 

उन्होंने कहा कि ओलचिकी लिपि का इस्तेमाल झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम में भी होता है. नेपाल और बांग्लादेश में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

 

रघुवर दास ने शिक्षा मंत्री से मांग की कि एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संस्थाओं को निर्देश दिया जाए कि संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकें, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाएं और डिजिटल सामग्री ओलचिकी लिपि में ही तैयार और प्रकाशित की जाए.

 

उन्होंने कहा कि इससे संताली भाषा की पहचान और इसके संरक्षण को मजबूती मिलेगी. रघुवर दास के अनुसार, शिक्षा मंत्री के साथ इस मुद्दे पर बातचीत सकारात्मक रही.

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