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संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी-धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने की मांग, SC का सवाल, क्या तिथि बदले बिना संशोधन हो सकता है...

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 New Delhi : भारत के संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की. साथ ही कोर्ट की एक अहम टिप्पणी सामने आयी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या तारीख को बरकरार रखते हुए प्रस्तावना में संशोधन किया जा सकता था? खबरों के अनुसार इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 29 अप्रैल तय की गयी है.                                                                                                                                  ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी और बलराम सिंह द्वारा याचिका दायर की गयी है

जान लें कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी और बलराम सिंह द्वारा याचिका दायर की गयी है. याचिका में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिये संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े जाने की वैधानिकता को चुनौती दी गयी है. ⁠ याचिका के अनुसार प्रस्तावना में इन शब्दों को जोड़ना संसद को अनुच्छेद 368 के तहत मिली संविधान संशोधन की शक्ति से अलग है.

इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया था

मामले की तह में जायें तो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया था. इसके माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द का समावेश किया गया था. थे. हालांकि संविधान में 1976 का जिक्र नहीं है, बल्कि संविधान को अपनाने की तिथि 29 नवंबर, 1949 अंकित है.

जस्टिस दत्ता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि प्रस्तावना में संशोधन नहीं हो सकता

इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ कर रही है. सुनवाई के क्रम में जस्टिस दत्ता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि प्रस्तावना में संशोधन नहीं हो सकता. लेकिन क्या तारीख को बरकरार रखते हुए प्रस्तावना में संशोधन किया जा सकता है? साथ ही कोर्ट ने वकीलों से अकादमिक दृष्टिकोण अपनाते हुए इस विषय पर विचार करने को कहा. जस्टिस दत्ता ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए, कहा कि यह शायद एकमात्र प्रस्तावना है जो मैंने देखी है जो एक तिथि के साथ है. इसमें कहा गया है कि हम यह संविधान अमुक तारीख को देते हैं. मूल रूप से ये दो समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष उस समय शब्द वहां नहीं थे. [wpse_comments_template]

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