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जमशेदपुर में घासी समाज का डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन, एसटी का दर्जा देने की मांग

  [caption id="attachment_207677" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2021/12/23-ghasi-1-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> डीसी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते घासी समाज के प्रतिनिधि[/caption] Jamshedpur : झारखंड एबोरिजिनल घासी ऑर्गानाइजेशन के बैनर तले कोल्हान के घासी समाज ने गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया. समाज की मांग है कि उनकी भाषा-संस्कृति एवं रहन-सहन आदिवासी सभ्यता के अनुरूप है. इसलिए उन्हें अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल किया जाय. प्रदर्शन के उपरांत 15 सूत्री मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा गया. इसे भी पढ़ें: पीएम">https://lagatar.in/pm-modi-said-cow-can-be-a-crime-for-some-people-for-us-cow-is-mother-it-is-worshipable/">पीएम

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प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सुमंत मुखी ने बताया कि कोल्हान के तमाम घासी प्रजाति के लोग आदिवासी सभ्यता-संस्कृति के साथ अपना जीवन यापन करते आए हैं. लेकिन एक साजिश के तहत उक्त समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर कर दिया गया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद आदिवासी समुदाय को कमजोर करने के उद्देश्य से घासी समाज को अनुसूचित जाति (एससी) में डाल दिया गया. प्रदर्शन में रमेश मुखी, संतोष मुखी, संजू मुखी, कुंदन मुखी, धीरज मुखी काली मुखी, सहित अन्य शामिल थे.

समाज की प्रमुख मांगें

1 घासी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए 2 समाज के भूमिहीन लोगों को भूमि प्रदान किया जाए 3 देश-राज्य का नाम रौशन करने वाले महापुरुषों को राजकीय सम्मान प्रदान किया जाए 4 1932 के खतियान की बाध्यता समाप्त की जाए 5 चतुर्थ वर्गीय नौकरियों में समाज के लोगों को शत-प्रतिशत समायोजित किया जाए 6 टाटा घराने के साथ समाज के लिखित करार को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाए 7 सभी घासी बस्तियों के नाम से हरिजन शब्द हटाया जाए 8 जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए खतियान की बाध्यता खत्म की जाए 9 आरक्षण को शत-प्रतिशत लागू किया जाए 10 सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों को प्राथमिकता के आधार पर प्रदान किया जाए 11 दूसरे समाज के लोगों को आवंटित क्लब की तर्ज पर घासी समाज को क्लब के लिए जगह दी जाए 12 तार कंपनी घासी बस्ती से विस्थापित किए गए 24 परिवारों का पुनर्वास किया जाए एवं आश्रित को नौकरी दी जाए 13 अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न अधिनियम के तहत सूचीबद्ध केसों का त्वरित मुआवजा दिया जाए 14 सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में कार्यरत घासी सफाईकर्मियों को स्थायी किया जाए. [wpse_comments_template]

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