Dhanbad : धनबाद में डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग पर निर्भर रहने की बजाय ‘ अपना हाथ जगन्नाथ‘ के सिद्धांत पर चलने की मजबूरी है. क्योंकि जिले के सबसे बड़े अस्पताल एसएनएमएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच किट का टोटा पड़ा हुआ है. बरसात में अनेक तरह की संक्रामक बीमारी की तरह डेंगू का प्रकोप भी देखने को मिलता है. जून व जुलाई को संक्रमण का महीना माना जाता है. इस माह में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, जो डेंगू जैसी बीमारी के वाहक होते हैं. परंतु जब जांच ही दुर्लभ हो तो इलाज कैसे सुलभ होगा. यह चिंता का विषय है. तय है कि ऐसे मरीजों के लिए मुसीबत आनेवाली ही है. मलेरिया पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार का कहते हैं कि जून व जुलाई संक्रमण का महीना होता है. उन्होंने बताया कि डेंगू साफ एवं ठहरे हुए पानी में पनपने वाले संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है. यह विषाणु जनित रोग है. अगर समय पर जांच एवं इलाज नहीं हो तो यह जानलेवा हो सकता है. यह सौभाग्य की ही बात है कि विगत 3 वर्ष के अंदर धनबाद में एक भी डेंगू के मरीज की मौत नहीं हुई है.
जांच के लिए एसएनएमएमसीएच ही एकमात्र विकल्प
विभागीय अधिकारियों की माने तो जिले में एकमात्र एसएनएमएमसीएच का माइक्रोबायोलॉजी लैब ही है, जहां डेंगू के सैंपल की जांच की जाती है. सदर अस्पताल और न ही किसी अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर डेंगू की जांच की व्यवस्था है. अधिकारियों का कहना है कि डेंगू की जांच के लिए एलाइजा किट बेहद जरूरी है. मच्छरों से फैलने वाली खतरनाक बीमारी की जांच एलाइजा कीट के बिना असंभव है. विगत तीन वर्षों में एक भी मौत की पुष्टि नहीं
वर्ष सैम्पल पॉजिटिव मौत 2020 18 01 00 2021 14 02 00 2023 69 05 00 क्या कहते हैं जिम्मेवार :
प्रभारी सिविल सर्जन व जिला मलेरिया विभाग के पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार का कहना है कि फिलहाल विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गयी है. परंतु जल्द ही विभाग से जानकारी हासिल कर उन्हें एलाइजा किट उपलब्ध कराएंगे, ताकि समय रहते डेंगू के मरीजो की जांच हों सके. डेंगू के लक्षण
अचानक तेज बुखार आना, सिर में और आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द, छाती और हाथों में चकत्ते दाने निकलना, मसूड़ों से खून आना, भोजन में अरुचि, भूख नहीं लगना डेंगू के लक्षण है. डेंगू से बचाव के उपाय
मच्छरों से बचें व आसपास सफाई रखें, पुराने बर्तनों तथा व्यवहार में न आने वाली वस्तुओं को हटा दें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, हमेशा मच्छरदानी के अंदर सोयें, बुखार होने पर खूब पानी पीयें और आराम करें, सप्ताह में एक दिन सूखा दिवस मनाएं. [wpse_comments_template]
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