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शहरी आजीविका मिशन फेल, बेरोजगरों को नहीं मिल रहा रोजगार

mithilesh kumar  Dhanbad: दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) का बुरा हाल है. इस योजना की सच्चाई यह है कि इससे जुड़कर निर्धन युवाओं का न कौशल विकास हो रहा है और न अच्छी कंपनी में जॉब मिल पा रहा है. लेकिन, इस योजना के नाम पर हर साल ट्रेनिंग सेंटर को मोटी कमाई जरूर हो रही है. केंद्र सरकार ने 2015 में इस योजना की शुरुआत की थी. तब से आज तक कितने युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला तथा कितने को निजी कंपनियों में जॉब मिला और कितने को स्वरोजगार से जोड़ा गया, निगम के पास इसका लिखित डाटा  नहीं है. निगम के अधिकारियों का कहना है DAY-NULM की साइट पर इसका डाटा है. लेकिन, पिछले कई दिनों से साइट नहीं खुल पा रही है, ऐसे में वे कुछ नहीं बता सकते .

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना भी फेल

मनरेगा की तर्ज पर राज्य सरकार ने कोरोना काल में शहरी बेरोजगरों के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक योजना शुरू की गई थी. इस योजना को शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक हो चुका है. अभी तक कुल 6400 लोगों का जॉब कार्ड बन गया है. निगम में 150 नये लोग आवेदन भी दे चुके हैं. लेकिन, निगम में इन सभी लोगों को आज तक रोजगार नहीं मिल पाया है. अभी तक महज 600 लोगों को ही रोजगार मिल पाया है. इतना ही नहीं, निगम के पास जो संसाधन है, उसमें कई लोग फिट भी नहीं बैठ पा रहे है. निगम के अधिकारियों का कहना है कि उनका मुख्य काम सफाई है. इसमें अकुशल लोगों को रखा जा सकता है, लेकिन पढ़े - लिखे लड़के इससे जुड़ना नहीं चाहते है. जबकि मेहनताना के बदले वे प्रत्येक श्रमिक को 316 रुपया देने को तैयार हैं . जो लोग इच्छुक होते हैं , उन्हें काम पर रखते हैं . इस योजना के तहत कम से कम 100 दिन रोजगर देना है. लेकिन, सफाई का काम तो साल भर चलता है. इसलिए इस क्षेत्र में रोजगार के अपार अवसर हैं . इसके अलावा पार्क की सफाई, रोड, नाली और भवन के निर्माण में इन श्रमिकों को अवसर दिया जाता है.

कोविड के कारण DAY-NULM प्रभावित

नगर मिशन प्रबंधक चंद्रशेखर ने बताया कि कोविड के कारण पिछले दो साल से DAYNULM प्रभावित है. लंबे लॉकडाउन के कारण युवाओं का पठन-पाठन प्रभावित रहा. 2021-22 सत्र की पढ़ाई पिछले अक्टूबर माह में शुरू हुआ. कुल 1200 युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा दी जा रही है. शहर के 3 सेंटरों को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है. साईं ब्यूटी हेल्थ केयर में 960 बच्चे अभी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. उन्हें हॉस्पिटैलिटी और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह कोर्स 6 महीने का है, जो भी पूरा नहीं हुआ है. इसके लिए अलावा अल हाफिज कॉलेज में 60 बच्चों को नर्सिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है. यह 6 से 3 महीने का कोर्स है, जो अभी पूरा नहीं हुआ है . इसके अलावा मोहलबनी इलाके में अंशिका इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 90 बच्चों को वेल्डिंग सिखाया जा रहा है. यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क है. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इनकी परीक्षा ली जाती है परीक्षा में पास होने के बाद इन्हें एसएससी इन्हें रोजगार मुहैया कराती है. यह भी पढें :">https://lagatar.in/dhanbad-70-murders-in-2021-till-november-77-in-2020/">

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