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देवबंद : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद असद मदनी ने कहा, हमें हमारे ही देश में अजनबी बना दिया गया है

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Lucknow : बेइज्जत होकर खामोश हो जाना कोई मुसलमानों से सीखे. हम तकलीफ बर्दाश्त कर लेंगे लेकिन देश का नाम खराब नहीं होने देंगे. अगर जमीयत उलेमा शांति को बढ़ावा देने और दर्द, नफरत सहन करने का फैसला करते हैं तो ये हमारी कमजोरी नहीं, ताकत है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद असद मदनी देवबंद में आयोजित जलसे में बोल रहे थे. जान लें कि उत्तर प्रदेश के देवबंद में आज उलेमा-ए-हिंद ने दो दिवसीय जलसे का आयोजन किया है. इसे भी पढ़ें : पंजाब">https://lagatar.in/punjab-bhagwant-mann-reduced-security-of-424-vips-including-akal-takht-jathedar-shahi-imam-dera-ke-mukhi-adgp-singer-musewala/">पंजाब

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इस्लामोफोबिया के खिलाफ लामबंद होने पर सहमति बनी

कॉन्फ्रेंस में देश भर से अलग-अलग संगठनों के लगभग 5000 प्रतिनिधि पहुंचे हैं. कॉन्फ्रेंस में पहले दिन इस्लामोफोबिया के खिलाफ लामबंद होने पर सहमति बनी. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सरकार को घेरा. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सकारात्मक संदेश देने के लिए धर्म संसद की तर्ज पर 1000 सद्भावना संसद के आयोजन का ऐलान किया. महमूद असद मदनी ने कहा कि हमें हमारे ही देश में अजनबी बना दिया गया है. महमूद असद मदनी ने अखंड भारत की बात पर भी निशाना साधा. कहा कि किस अखंड भारत की बात करते हैं? मुसलमानों के लिए आज राह चलना मुश्किल कर दिया है. ये सब्र का इम्तेहान है. इसे भी पढ़ें :  पीएम">https://lagatar.in/pm-modi-said-in-rajkot-did-not-do-anything-in-eight-years-due-to-which-the-public-has-to-bow-down/">पीएम

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देश  धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक अतिवाद का सामना कर रहा है

इससे पूर्व इस्लामोफोबिया को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया. प्रस्ताव में इस्लामोफोबिया और मुस्लिमों के खिलाफ उकसावे की बढ़ती घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस्लामोफोबिया सिर्फ धर्म के नाम पर शत्रुता नहीं, इस्लाम के खिलाफ भय और नफरत को दिल और दिमाग पर हावी करने की मुहिम है. यह मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ एक प्रयास है. इसके कारण आज देश को धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक अतिवाद का सामना करना पड़ रहा है. धर्मगुरुओं ने कहा कि 2017 में प्रकाशित लॉ कमीशन की 267 वीं रिपोर्ट में हिंसा के लिए उकसाने वालों के लिए कानून बनाया जाये. इस कानून में सजा दिलाने के प्रावधान की मांग की गयी. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लॉ कमीशन की इस सिफारिश पर तुरंत कदम उठाने को जरूरी बताया है.

14 मार्च को इस्लामोफोबिया रोकथाम दिवस मनाने की मांग 

धर्मगुरुओं ने कहा कि सभी धर्म, जाति और कौम के बीच आपसी सद्भाव, सहनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रायोजित इस्लामोफोबिया की रोकथाम का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 14 मार्च को मनाया जाये. हर प्रकार के नस्लवाद और धार्मिक आधार पर भेदभाव को मिटाने के लिए साझा संकल्प लिया जाये.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बनाया विभाग

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने ताजा हालात को गंभीर बताते हुए कहा है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अलग विभाग बनाने की बात कही. जमीयत ने कहा है कि हमने इस स्थिति से निपटने के लिए `जस्टिस एंड एम्पावरमेंट इनीशिएटिव फॉर इंडियन मुस्लिम` नाम से विभाग बनाया है. इसका उद्देश्य नाइंसाफी और उत्पीड़न को रोकने, शांति और न्याय बनाए रखने की रणनीति विकसित करना है. मौलाना नियाज फारुकी ने कहा कि जलसे में ज्ञानवापी, मथुरा, कुतुब मीनार जैसे तमाम मुद्दों के साथ मदरसों में आधुनिक शिक्षा को लेकर चर्चा होगी. कहा कि अदालतों में चल रहे मामलों में मजबूती से पैरवी की जायेगी. शायर नवाज देवबंदी ने कहा कि लोगों के बीच मोहब्बत का पैगाम पहुंचाने की जरूरत है. पैगाम पहुंचाया जाए कि लोगों को मंदिर और मस्जिद के नाम पर लड़ने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को मोहब्बत का पैगाम लेकर आगे बढ़ना होगा. जमीयत ने देश में सद्भावना मंच बनाने की बात कही. [wpse_comments_template]

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