Deoghar : देवघर https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=330956&action=edit">
style="color: #ff0000;">(Deoghar)- अभिभावकों के लिए चेतावनी भरी खबर है. देवघर के स्कूलों में पढ़ रहे आपके बच्चे सुरक्षित नहीं है. ऑटो में बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूसकर स्कूल ले जाया जाता है. बच्चों को ऑटो में जिस तरह ठूसकर ले जाया जाता है, उससे कभी भी हादसा हो सकता है. जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इसे लेकर बिल्कुल लापरवाह है. कई बच्चे">https://www.jagran.com/jharkhand/deoghar-11988048.html">बच्चे
ऑटो के पिछले हिस्से में लटकते भी दिखते हैं. खचाखच भरे ऑटो में बच्चों के बैग ऑटो में लटका दिए जाते हैं. देवघर के सभी प्राइवेट">https://www.jagran.com/jharkhand/dumka-school-negligence-19142740.html">प्राइवेट
और सरकारी स्कूल के बच्चों को स्कूल लाने और छोड़ने के मामले में कमोबेश हालात एक जैसी है. तरीका ये है कि जिन- स्कूलों के बच्चे जान पर खेलकर ऑटो से स्कूल पहुंचते हैं, उन स्कूलों के प्रंबधक को अपने छात्र-छात्राओं की हिफाजत का पूरा ध्यान रखना चाहिए. लेकिन स्कूलों का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं है. बच्चों को लेकर ये ऑटो शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजरती है. स्कूल के समय में स्कूली">https://hindi.news18.com/news/jharkhand/deoghar-tata-magic-collides-with-tree-injures-more-than-six-schoolchildren-1356784.html">स्कूली
वाहनों के अलावा अन्य गाड़ियां भी सड़क पर दौड़ती है. स्थिति को देखकर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=332137&action=edit">यह
भी पढ़ें : देवघऱ : जिला परिषद् अध्यक्ष बनीं किरण कुमारी [wpse_comments_template]
style="color: #ff0000;">(Deoghar)- अभिभावकों के लिए चेतावनी भरी खबर है. देवघर के स्कूलों में पढ़ रहे आपके बच्चे सुरक्षित नहीं है. ऑटो में बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूसकर स्कूल ले जाया जाता है. बच्चों को ऑटो में जिस तरह ठूसकर ले जाया जाता है, उससे कभी भी हादसा हो सकता है. जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इसे लेकर बिल्कुल लापरवाह है. कई बच्चे">https://www.jagran.com/jharkhand/deoghar-11988048.html">बच्चे
ऑटो के पिछले हिस्से में लटकते भी दिखते हैं. खचाखच भरे ऑटो में बच्चों के बैग ऑटो में लटका दिए जाते हैं. देवघर के सभी प्राइवेट">https://www.jagran.com/jharkhand/dumka-school-negligence-19142740.html">प्राइवेट
और सरकारी स्कूल के बच्चों को स्कूल लाने और छोड़ने के मामले में कमोबेश हालात एक जैसी है. तरीका ये है कि जिन- स्कूलों के बच्चे जान पर खेलकर ऑटो से स्कूल पहुंचते हैं, उन स्कूलों के प्रंबधक को अपने छात्र-छात्राओं की हिफाजत का पूरा ध्यान रखना चाहिए. लेकिन स्कूलों का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं है. बच्चों को लेकर ये ऑटो शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजरती है. स्कूल के समय में स्कूली">https://hindi.news18.com/news/jharkhand/deoghar-tata-magic-collides-with-tree-injures-more-than-six-schoolchildren-1356784.html">स्कूली
वाहनों के अलावा अन्य गाड़ियां भी सड़क पर दौड़ती है. स्थिति को देखकर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=332137&action=edit">यह
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