Deoghar : कोरोना के कारण दो साल बाद श्रावणी मेला गुलज़ार हुआ है. मेले में आने वाले कांवड़ियों की सेवा और बेहतर आमदनी की आस लगाये दुकानदारों की हालत इस बार पतली नज़र आ रही है. सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक कांवड़िया पथ पर हज़ारों दुकान सजे हैं. लेकिन ज़्यादातर दुकानदारों के चेहरे पर मायूसी की गहरी परछाई साफ़ झलक रही है. कोरोना के कारण दो साल मेला नहीं लगा. तो उन दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. इस बार मेला लगा तो दुकानदारों ने बड़ी उम्मीदों के साथ दुकान सजाये. भारी भरकम जमीन का किराया दिया. तंबू और पंडाल लगाये. पूंजी लगाकर सामानों की खरीदारी की. इतनी तैयारी के बाद कांवरियों की राह देखने लगे. लेकिन आलम यह है कि इक्का दुक्का कांवरिये ही दुकानों का रूख कर रहे हैं. लिहाज़ा दुकानदारों के लिए पूंजी निकालना भी अब मुश्किल हो रहा है. महंगाई और कांवरियों की कम संख्या भी है वज़ह दुकानदार कहते हैं कि कोरोना के कारण कांवरियों की संख्या पहले जैसी नहीं है. साथ ही जीएसटी और महंगाई ने रही सही कसर निकाल कर रख दी है. कांवरिये खर्च करने में दो बार सोचते हैं. बहुत ज़रूरी होने पर ही कांवरिया सीमित खरीदारी कर रहे हैं. कांवरियों ने भी कहा कि महंगाई के कारण दस रूपये खर्च करने से पहले उन्हें अपनी जेब टटोलनी पड़ रही है. कांवरिया सेवा शिविरों ने भी मज़ा किया किरकिरा दुकानदार कहते हैं कांवरिया पथ पर जगह-जगह पहले से कहीं ज़्यादा कांवरिया शिविर लगाये गये हैं. जहां कांवरियों को ठहरने, चाय, पानी और हल्का नाश्ता की सुविधा निशुल्क मिल जा रही है. इसलिए कांवरिया किसी दुकान पर ठहरने के बज़ाय शिविरों का रूख कर रहे हैं. जिसका सीधा असर दुकानदारों की आमदनी पर पड़ रही है. यह">https://lagatar.in/deoghar-two-lakh-snatched-from-sbi-customer-in-broad-daylight/">यह
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