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देवघर : जिला प्रशासन और पंडा धर्मरक्षिणी सभा में ठनी

एसडीओ ने धर्मरक्षिणी के महामंत्री पर लगाया शांतिभंग करने का आरोप, भेजा नोटिस
Deoghar : देवघर के श्रावणी मेला का अभी एक पक्ष ही बीता है कि जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के संगठन पंडा धर्मरक्षिणी सभा में ठन गई है. पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने मलमास में बाबा वैद्यनाथ पर लगाए गए जलार्पण अरघा को हटाने की मांग की तो दूसरी ओर जिला प्रशासन ने धर्मरक्षिणी के महामंत्री पर शांति भंग के प्रयास, अधिकारियों को धमकी देने, सरकारी काम में बाधा डालने आदि का आरोप लगाते हुए धारा 107 के तहत नोटिस भेज दिया. मालूम हो कि धर्मरक्षिणी के महामंत्री कार्तिक नाथ ठाकुर पर कई आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन की ओर से एसडीओ कोर्ट में धारा 107 के तहत मामला दर्ज कराया गया है. इस मामले में मंदिर प्रभारी सह एसडीओ ने नोटिस जारी कर महामंत्री को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है. नोटिस में बाबा मंदिर में जबरन प्रवेश करने व मंदिर से अवैध काउंटर हटाने के समय पदाधिकारियों से बहस और वातावरण को तनावपूर्ण बनाने का आरोप लगाया गया है.

जिला प्रशासन पहले से खार खाए बैठा है : महामंत्री

[caption id="attachment_706236" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/07/NDimgf7845a82d0f84a5f819963818f55362311-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> महामंत्री कार्तिकनाथ ठाकुर व अन्य[/caption] इस संबंध में कार्तिक नाथ ठाकुर ने बताया कि यह दमनात्मक कार्रवाई है. वे लाखराज जमीन के मामले को लेकर धरना पर बैठे थे इससे जिला प्रशासन उनसे खार खाए बैठा है. ठाकुर ने कहा कि प्रशासन ने शीघ्र दर्शन शुल्क में वृद्धि कर दी थी, मैंने इसका विरोध किया. मंदिर प्रशासक हर दिन परंपरा का उल्लंघन कर रहा है. इसके खिलाफ आवाज उठाने का नतीजा है कि यह केस किया गया है. शांति भंग करने के सवाल पर ठाकुर ने कहा कि श्रावणी के एक दिन पहले मंदिर से फूल, बेलपत्र बेचने वाले और पंड़ों का अकाउंटर उठाने के संबंध में एसडीओ के साथ बैठक हुई थी. तय हुआ था कि मेले में गरीब लोग दुकान लगाकर रोजी-रोटी कमाते हैं इसलिए इन्हें मेला के बाद हटाए. बावजूद दूसरे दिन काउंटर हटाने के लिए पदाधिकारी व पुलिस को भेज दिया गया था. उस दौरान मैंने पदाधिकारियों को बताया तो पदाधिकारी वापस लौट गए. इस मामले में शांतिभंग का सवाल ही नहीं उठता है.

प्रशासन तत्काल हटाए बाबा पर लगा अरघा

अरघा के सवाल पर धर्मरक्षिणी के महामंत्री ने कहा कि हमने उपायुक्त को आवेदन देकर अरघा हटाने मांग की थी. पत्र में कहा था कि पहले लिए गए निर्णय के अनुसार एक पक्ष का श्रावणी मेला समाप्त हो गया है, अब अरघा हटा दिया जाए. बासुकीनाथ मंदिर से भी अरघा हटा दिया गया है, यहां भी स्पर्श पूजा की महत्व है. भीड़ भी नहीं है, ऐसे में अरघा का क्या औचित्य? ठाकुर ने कहा कि मैं यह लड़ाई हजारों लाखों श्रद्धालुओं के लिए लड़ रहा हूं हम पर दमनकारी कार्रवाई करने वाले पदाधिकारियों पर राज्य सरकार को संज्ञान लेना चाहिए. ठाकुर ने चेतावनी के लहजे में कहा कि शासन-प्रशासन हम लोगों को उसकाने का काम कर रहा है. हम लोग डरकर गलत नहीं होने देंगे. प्रशासन मंदिर की व्यवस्था से खिलवाड़ न करे, यही बेहतर है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=705437&action=edit">यह

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