Jitan Kumar
Deoghar : बसंत पंचमी विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना का दिन है. शुक्रवार को देश भर में सरस्वती पूजा की धूम है. वहीं, दूसरी ओर बाबानगरी देवघर में इस दिन को बाबा बैद्यनाथ के तिलकोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है. परंपरा के अनुसार तिलक की रस्म अदा करने के लिए बड़ी संख्या में मिथिलांचल वासी बाबाधाम पहुंचे हैं. बसंत पंचमी के दिन हर साल अहले सुबह से ही बाबा मंदिर में मिथलांचल वासी कांवर लेकर पहुंचते है और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर तिलकोत्सव मनाते हैं.
बसंत पंचमी के दिन हुआ था महादेव का तिलकोत्सव
प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के दिन बाबा मंदिर का नजारा सावन जैसा हो जाता है. पूरा मंदिर मिथिला वासियों से पट जाता है. मिथला वासियों की मानें, तो बसंत पंचमी के दिन महादेव का तिलक हुआ था. मां जानकी की नगरी से होने के कारण मिथलावासी अपने को बाबा का संबंधी मानते हैं. इसी नाते आज के दिन बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होने वे देवघर आते हैं और बाबा का जलाभिषेक कर शिव बारात में शामिल होने का न्योता देते हैं. फिर, शिवरात्रि के अवसर पर शिव विवाह में शामिल होने का संकल्प लेकर वापस लौट जाते हैं.
पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित पंडित दिवाकर मिश्रा ने बताया कि बसंत पंचमी के अवसर पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा महादेव को तिलक चढ़ाने की अति प्राचीन परंपरा चली आ रही है. उस काल से आज तक ये परंपरा मिथला के लोग निभा रहे हैं. वे हिमालय की पुत्री मां पार्वती के विवाह में शामिल होने का निमंत्रण देते हैं और आज से ही इनलोगों की महाशिवरात्रि की शुरुआत हो जाती है.
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