Deoghar : बाल विवाह की रोकथाम, महिलाओं व बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा व सशक्तिकरण के उद्देश्य से देवघर में गुरुवार को अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह आयोजन बाल विवाह मुक्त झारखंड व मिशन शक्ति के तहत किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने की. कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने, बाल विवाह उन्मूलन के लिए कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने व विभागों के बीच समन्वय बनाकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई.
डीसी ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना किसी एक व्यक्ति या विभाग के बस की बात नहीं है, इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. बाल विवाह सामाजिक रूढ़िवाद का परिणाम है, जिससे बाहर निकलना हम सभी की जिम्मेदारी है. जिला, प्रखंड व पंचायत स्तर पर पदाधिकारी तैनात हैं, जरूरत है साहस के साथ ऐसी घटनाओं का विरोध करने और समय पर सूचना देने की. उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और अधिकारों के चलते महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, आत्मनिर्भर बन रही हैं. वे शिक्षा व आजीविका के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं. इसके बावजूद बाल विवाह जैसी कुरीति आज भी समाज के लिए गंभीर चुनौती है.
डीसी ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह की किसी भी सूचना को गंभीरता से लिया जाएगा. कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, उसे तुरंत संबंधित पदाधिकारी, सीएमपीओ, पुलिस या अनुमंडल प्रशासन को दें. सूचना मिलते ही प्रशासन व पुलिस त्वरित कार्रवाई कर वैसे विवाह को रोकेंगे.
प्रशिक्षण सत्र में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि बालिकाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और बालकों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है. डीसी ने लोगों को बाल विवाह व डायन कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होने की शपथ भी दिलाई. कार्यशाला में एसडीओ, एसडीपीओ, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी, महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
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