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हाईकोर्ट द्वारा भू-माफिया के रूप में चिह्नित फौलाद की याचिका को बोकारो उपायुक्त की अदालत ने खारिज की

Ranchi: 4.64 एकड़ वन भूमि को प्रतिबंधित सूची से निकालने की मांग से धनंजय प्रसाद फौलाद व अन्य की याचिका को उपायुक्त की अदालत ने खारिज कर दी है. बोकारो में वन भूमि की खरीद बिक्री के मामले में हाईकोर्ट ने फौलाद सहित अन्य को भू-माफिया के रूप में चिह्नत किया था. साथ ही सरकारी भूमी को माफिया की नज़र से बचाने के लिए SOP बनाने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार ने इससे संबंधित SOP बनाया था.

 

धनंजय प्रसाद ने उपायुक्त की अदालत में एक याचिका (NGDRS केस नंबर 19/2024-25) दायर की. इसमें भू-माफिया की ओर से मौजा बांधघोड़ा के खाता नंबर-28, प्लॉट नंबर 978 के 4.64 एकड़ जमीन को प्रतिबंधित सूची (NGDRS) से निकालने की मांग की थी.

 

सुनवाई के दौरान उपायुक्त की अदालत में वन विभाग सहित  सभी पक्षों को जमीन पर अपने अपने दावों से संबंधित दस्तावेज और पक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया था. इस निर्देश के आलोक में सभी पक्षों ने दलील दी और अपने अपने समर्थन में दस्तावेज जमा किया. इसकी समीक्षा के बाद उपायुक्त की अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है.

 

उपायुक्त ने अपने फैसले में कहा है कि मौजा बांधघोड़ा संबंधित जमीन के मूल रैयत ज्योति लाल शर्मा के पास बिक्री योग्य कोई जमीन नहीं थी. इसके बाद भी मूल रैयत ने छह एकड़ जमीन की खरीद बिक्री का पावर ऑफ अटर्नी दिया. संबंधित जमीन पर दोहरी, तिहरी जमाबंदी कायम है.

 

जिस व्यक्ति को पावर ऑफ अटर्नी मिला था, उसके पास भी बेचने के लायक कोई जमीन नहीं थी. इसके बावजूद भूमि विहीन पावर ऑफ अटर्नी के आधार पर एक ही जमीन कई बार बेची और खरीदी गयी.

 

बांधगोड़ा मौजा के संबंधित खाता प्लॉट के 4.76 एकड़ ज़मीन पर वन विभाग का दावा है. लेकिन हाल सर्वे के अनुसार वन विभाग के नाम पर 7.42 एकड़ जमीन दर्ज है. इसलिए भू-राजस्व विभाग द्वारा 16 दिसंबर 2021 को जारी अधिसूचना के आलोक में संबंधित जमीन को NGDRS की सूची से निकालने के आदेश को खारिज किया जाता है. अगर आवेदक चाहे तो सक्षम न्यायालय में ज़मीन पर अपने दावों से संबंधित केस दायर कर सकता हैं.

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