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2012 व 2017 में कांग्रेस के विपक्ष में रहते भी राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग नहीं, 2022 में तो इतिहास ही रच डाला

Nitesh ojha Ranchi: राष्ट्रपति चुनाव में आये फाइनल नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है. जिसमें खास चर्चा कांग्रेस विधायकों की ओर से बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग को लेकर है. क्रॉस वोटिंग भी ऐसा जो पूर्व के राष्ट्रपति चुनावों के विपरीत इस बार एक इतिहास ही बना दिया. यह स्थिति तब है, जब कांग्रेस पार्टी प्रदेश की सत्ता में है. 2012 और 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के समय कांग्रेस विपक्ष में थी, तब तत्कालीन नेतृत्व ने एक तो क्रॉस वोटिंग तक नहीं होने दिया, साथ ही उम्मीद से ज्यादा विधायकों का समर्थन भी अपने प्रत्याशी को दिला दिया. इसे भी पढ़ें - दिल्ली:">https://lagatar.in/delhi-cbse-will-not-release-topper-list-for-class-10th-12th-examinations/">दिल्ली:

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2012, 2017 में कांग्रेस विधायकों की संख्या 15 भी नहीं, पर उम्मीद से ज्यादा वोट यूपीए प्रत्याशी को

2012 के राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए प्रत्याशी रहे प्रणब मुखर्जी को कुल 60 और 2017 के चुनाव में यूपीए प्रत्याशी रही मीरा कुमार को 26 विधायकों का समर्थन मिला था. जबकि दोनों चुनावों के समय तत्कालीन कांग्रेस विधायकों की संख्या 15 भी नहीं थी. 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के समय प्रणब मुखर्जी यूपीए प्रत्याशी थे. कांग्रेस 14 विधायकों के साथ प्रदेश की सबसे बडी विपक्षी पार्टी थी. प्रदेश में भाजपा नेतृत्व वाली अर्जुन मुंडा की सरकार थी, जिसमें झामुमो प्रमुख सहयोगी थी. दोनों पार्टियों के विधायकों की संख्या 18-18 थी. वहीं तत्कालीन झारखंड विकास मोर्चा के 11, आजसू और आरजेडी के 5, जदयू के 2 और निर्दलीय विधायक थे. उपरोक्त सभी दल कांग्रेस के धूरविरोधी पार्टियों में शामिल रहे हैं. इसके बावजूद तत्कालीन नेतृत्व की कुशल रणनीति के कारण प्रणब मुखर्जी को कुल 60 विधायकों का समर्थन मिला था. 2017 में प्रदेश में 37 विधायकों वाली रघुवर सरकार सत्ता में थी. राष्ट्रपति चुनाव के समय यूपीए प्रत्याशी मीरा कुमार और एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद थे. विपक्षी पार्टियों में झामुमो के पास 19, जेवीएम के 8, कांग्रेस के 6, आजसू के 5 सहित अन्य दल थे. राष्ट्रपति चुनाव में भले ही मीरा कुमार चुनाव हार गयी हों, लेकिन उस समय भी उन्हें 26 विधायकों का वोट मिला था. यानी विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस की तरफ से क्रॉस वोटिंग नहीं हुआ.

यूपीए प्रत्याशी यशवंत सिन्हा को मिले केवल 9 वोट

2022 के राष्ट्रपति चुनाव में झारखंड के कुल 80 विधायकों ने वोट किये. चुनाव पूर्व जो अंदेशा था, उसके मुताबिक द्रौपदी मुर्मू को 60 विधायकों (भाजपा के 25, आजसू का 2, झामुमो का 30, एनसीपी का एक और निर्दलीय 2 विधायक) का ही समर्थन मिलता दिख रहा था. लेकिन आये नतीजे से साफ है कि एनडीए प्रत्याशी को कुल 70 वोट मिले. बचे 10 वोट में से एक रद्द हुआ. यानी यूपीए प्रत्याशी को केवल 9 वोट.

2022 का चुनाव प्रदेश नेतृत्व पर सवाल ही उठा दिया है

आज जब कांग्रेस विधायकों की संख्या 18 है और पार्टी सत्ता में है, तब भी यूपीए प्रत्याशी यशवंत सिन्हा को केवल 9 विधायकों का ही समर्थन मिलना चर्चा का केंद्र बिंदु तो बना ही साथ ही प्रदेश नेतृत्व पर भी सवाल उठा दिया. इन 9 विधायकों में से अगर गैर कांग्रेसी 2 विधायकों (आरजेडी के सत्यानंद भोक्ता और माले के विनोद सिंह) का वोट घटा दें, तो यशवंत सिन्हा को समर्थन देने वाले कांग्रेस विधायकों की संख्या 7 ही बनती है. इसे भी पढ़ें - BIG">https://lagatar.in/plant-and-protect-a-tree-in-your-campus-the-government-will-give-5-units-of-electricity-free-hemant-soren/">BIG

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