रघुवर सरकार ने राजा बंगला की 4.85 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री एवं किसी भी निर्माण कार्य पर लगाई थी रोक :: विभाग मौन :: भू-माफियाओं ने सरकारी बोर्ड उखाड़ कर फेंक दिया 2018 में किसी प्रकार के निर्माण कार्य पर लगी थी रोक Pramod Updahyay Hazaribagh: जिले में शहर से लेकर गांव तक जमीन पर अवैध कब्जे का मामला लगातार उजागर हो रहा है. अब तो भू माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि अधिकारी से लेकर सरकार के आदेश का भी इन्हें कोई डर नहीं है. सरकारी रोक के बावजूद भी बोर्ड उखाड़ कर जमीन की खरीद-बिक्री की जा रही है. वर्तमान में राजा बंगला पर भू-माफियों की नजर पड़ गई है. [caption id="attachment_848300" align="aligncenter" width="483"]
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alt="" width="483" height="736" /> निर्माण स्थल पर काम पर रोक लगाने से संबंधित लगा साइन बोर्ड[/caption] राजा बंगला के खाता नंबर 15, प्लॉट नंबर 35,35/244,/35,245 रकबा करीब 4.85 एकड़ जमीन पर पदमा राजा कामाख्या नारायण सिंह की दावेदारी थी. वे राजा बंगला में बने मकान से किराया वसूलते थे और खाली जमीन की बिक्री भी करते थे. सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक राज्य सरकार और राजा कामाख्या नारायण के बीच उक्त जमीन को लेकर मुकदमा चला और अंत में फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया. वर्ष 2018 में झारखंड की तत्कालीन रघुवर सरकार ने राजा बंगला की 4.85 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री एवं नवनिर्मित भवन एवं बने हुए मकान पर किसी प्रकार का कार्य नहीं होने का आदेश जारी किया था. इससे संबंधंधित एक बोर्ड भी लगाया गया है. लेकिन राजा बंगला में रहने वाले मकान मालिक इन दिनों सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं. बोर्ड को उखाड़ कर फेंक दिया गया है. यहां लगातार चार मंजिला मकान बनाए जा रहे हैं और विभाग मौन है. इससे मकान मालिकों का मनोबल बढ़ता ही जा रहा है. शहर में बालू की भारी किल्लत के बावजूद भी राजा बंगला में कई गाड़ी बालू उपलब्ध हो रहा है. राजा बंगला में रहनेवाले कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभाग से मिली भगत से यहां मकान बन रहे हैं. राजा बंगला में रहनेवाले ऐसे कई लोग हैं, जिनका मकान अधूरा है. ये लोग अपने मकान का सुंदरीकरण और दो-तीन मंजिला करना चाहते हैं, लेकिन वे लोग सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं.
alt="" width="483" height="736" /> निर्माण स्थल पर काम पर रोक लगाने से संबंधित लगा साइन बोर्ड[/caption] राजा बंगला के खाता नंबर 15, प्लॉट नंबर 35,35/244,/35,245 रकबा करीब 4.85 एकड़ जमीन पर पदमा राजा कामाख्या नारायण सिंह की दावेदारी थी. वे राजा बंगला में बने मकान से किराया वसूलते थे और खाली जमीन की बिक्री भी करते थे. सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक राज्य सरकार और राजा कामाख्या नारायण के बीच उक्त जमीन को लेकर मुकदमा चला और अंत में फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया. वर्ष 2018 में झारखंड की तत्कालीन रघुवर सरकार ने राजा बंगला की 4.85 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री एवं नवनिर्मित भवन एवं बने हुए मकान पर किसी प्रकार का कार्य नहीं होने का आदेश जारी किया था. इससे संबंधंधित एक बोर्ड भी लगाया गया है. लेकिन राजा बंगला में रहने वाले मकान मालिक इन दिनों सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं. बोर्ड को उखाड़ कर फेंक दिया गया है. यहां लगातार चार मंजिला मकान बनाए जा रहे हैं और विभाग मौन है. इससे मकान मालिकों का मनोबल बढ़ता ही जा रहा है. शहर में बालू की भारी किल्लत के बावजूद भी राजा बंगला में कई गाड़ी बालू उपलब्ध हो रहा है. राजा बंगला में रहनेवाले कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभाग से मिली भगत से यहां मकान बन रहे हैं. राजा बंगला में रहनेवाले ऐसे कई लोग हैं, जिनका मकान अधूरा है. ये लोग अपने मकान का सुंदरीकरण और दो-तीन मंजिला करना चाहते हैं, लेकिन वे लोग सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं.
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