Ranchi : छूट के बावजूद केंद्रीय लोक उपक्रम नेशनरल कॉपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन (NCCF) द्वारा राज्य के विश्वविद्यालयों से GST की वसूली की जा रही है. केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन चलने वाला यह लोक उपक्रम फिलहाल राज्य के तीन विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहा है. इसमें रांची, विनोबा भावे और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय शामिल है.
इस केंद्रीय लोक उपक्रम (PSU) द्वारा राज्य के तीनों विश्वविद्यालयों में परीक्षा से संबंधित सेवाएं दी जाती है. इसमें छात्रों के रजिस्ट्रेशन लेकर डिग्री तक की सेवाएं शामिल है. इस PSU द्वारा विश्वविद्यालयों को दी जाने वाली इन सेवाओं के बदले 18% की दर से GST की वसूली का जाती है. जबकि केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय को GST के दायरे से मुक्त रखा है. यानी विश्वविद्यालय को शिक्षा से संबंधित दी जानेवाली सेवाओं पर विश्वविद्यालयों द्वारा सेवा देने वालों को GST का भुगतान नहीं करना है.
GST के दो हिस्से हैं. गुड्स (Goods) और सर्विस (Services) है. GST में इन दोनों की अलग-अलग पहचान के लिए नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है. इससे यह पता चलता है कि वह गुड्स है या सर्विस. गुड्स के लिए 2-8 अंकों का HSN कोड और सर्विस के लिए छह अंकों के SAC कोड का इस्तेमाल किया जाता है. HSN के शुरुआती अंक 01-98 तक उत्पाद के आधार पर अलग अलग होते हैं. SAC में छह अंक ही होते हैं और वह 99 से शुरू होता है. सेवा देने वाली संस्था या इकाई द्वारा काम पूरा करने के बाद जो बिल दिया जाता है वह इसकी के आधार पर होता है.
केंद्र सरकार ने GST लागू करने से पहले अधिसूचना संख्या-11/2017 और अधिसूचना संख्या-12/2017 जारी कर शैक्षणिक संस्थाओं पर परीक्षा से संबंधित सेवाओं को टैक्स से मुक्त कर दिया गया था. परीक्षा से संबंधित सेवाओं में एडमिशन से परीक्षा तक का काम शामिल है. NCCF द्वारा विश्वविद्यालय को 998399 SAC कोड के साथ बिल दिया जा रहा है. इसके बावजूद इसमें 18 प्रतिशत की दर से GST की वसूली की जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की ओर से NCCF को यह कहा गया कि वह 18 प्रतिशत GST के बदले शून्य GST के साथ बिल दे.
NCCF के मुद्दे पर इससे पहले ही विवाद पैदा हो चुका है. विवाद की वजह रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में परीक्षा से जुड़े रेट का अलग-अलग होना है. रांची विश्वविद्यालय में NCCF का रेट सबसे ज्यादा होने के मुद्दे पर उभरे विवाद के बाद मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था. इसमें उच्च शिक्षा एंव तकनीकी विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया था. रेट पर उभरे विवाद की जांच के लिए बनी इस समिति ने अपनी रिपोर्ट दी या नहीं. इसकी जानकारी किसी को नहीं मिली.

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