Ranchi : झारखंड में लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत वर्ष 2021-22 में 1500 किलोमीटर सड़क का विकास होगा. वहीं सड़कों के निर्माण के साथ 15 वर्षों तक लोक निजी भागीदारी के तहत मैनटेनेंस भी होगा. पथ निर्माण विभाग ने लोक निजी भागीदारी के तहत होने वाले सड़क निर्माण कार्य की देखरेख के लिए विशेष प्रयोजन तंत्र का गठन किया है. जिसे स्पेशल पर्पज व्हीकल (special purpose vehicle,spv) के नाम से जाना जाता है. पथ निर्माण विभाग एवं IL & FS Co. Ltd के संयुक्त उपक्रम के रूप में Jharkhand accelerated road development company limited का गठन किया गया है. प्रदेश में बेहतर क्वालिटी वाले सड़कों के निर्माण के लिए पथ निर्माण विभाग कई योजनाओं पर काम चल रहा है. प्रदेश में अभी पांच सड़कों का विकास पीपीपी मोड़ पर करने का निर्णय लिया गया है. इसे भी पढ़ें - AICTE">https://lagatar.in/maths-physics-not-a-must-for-engineering/36566/">AICTE
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सड़कों का विकास पीपीपी मोड़ के तहत होना है
जिन पांच सड़कों का विकास पीपीपी मोड़ के तहत होना है, इसमें सबसे लंबी सडक 68.7 किलोमीटर है. यह सड़क चाईबासा, सरायकेला होते हुए कांड्रा से चौक पथ तक जाती है. इसके साथ रांची-पतरातू, रिंग रोड, आदित्यपुर- कांड्रा रोड आदि शामिल है. इन सड़कों के अलावा भी एसपीवी के तहत कई सड़कों का अभी चयन होना है. इसे भी पढ़ें -जानें">https://lagatar.in/know-what-is-the-secret-of-vidyut-jammwals-fit-body-actor-specializes-in-martial-arts/36550/">जानेंक्या है Vidyut Jammwal की फिट बॉडी का राज, मार्शल आर्ट में माहिर हैं एक्टर
झारखंड में SPV से होगी इन सड़कों की मॉनिटरिंग
- रांची-पतरातू- रामगढ पथ, कुल लंबाई-62किलोमीटर
- रांची रिंग रोड के सेक्शन 3, 4, 5 एवं 6, कुल लंबाई-36.192 किलोमीटर
- चाईबासा- सरायकेला- कांड्रा- चौक पथ, कुल लंबाई - 68.7 किलोमीटर
- आदित्यपुर- कांड्रा पथ, कुल लंबाई-15.5 किलोमीटर
- रांची रिंग रोड के सेक्शन-7 के 6 लेन, कुल लंबाई 23.6 किलोमीटर
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क्या है पीपीपी मोड
पीपीपी मोड का अर्थ है किसी भी परियोजना के लिये सरकार या उसकी किसी वैधानिक संस्था और निजी क्षेत्र के बीच हुआ लंबी अवधि का समझौता. इस समझौते के तहत शुल्क लेकर ढांचागत सेवा प्रदान की जाती है. इसमें आमतौर पर दोनों पक्ष मिलकर एक स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करते हैं. जो परियोजना पर अमल का काम करता है. दोनों पक्षों के बीच जिस समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, उसे मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट कहा जाता है. आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया ने जब गति पकड़ी, तब देश के ढांचागत क्षेत्र में बदलाव आना शुरू हुआ. इस क्षेत्र में विकास के लिये सार्वजनिक निजी भागीदारी का निवेश मॉडल काफी लोकप्रिय बनकर उभरा है. इसे भी पढ़ें -भारत">https://lagatar.in/india-is-no-longer-a-democratic-country-rahul-gandhi-cited-freedom-house-and-v-democracy-report/36555/">भारतलोकतांत्रिक देश नहीं रहा, राहुल गांधी ने फ्रीडम हाउस और वी-डेमोक्रेसी की रिपोर्ट का हवाला दिया
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