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देवघर : बाबा मंदिर प्रांगण में नीलचक्र पर भी श्रद्धालु करते हैं जलार्पण

 
Deoghar : बाबा बैद्यनाथ की महिमा का बखान शास्त्रों में है. शास्त्रों में यह जिक्र भी है कि देवी कामाख्या रावण का रास्ता नहीं रोकती तो त्रेता युग में बाबा बैद्यनाथ लंका में स्थापित हो जाते. रावण भगवान शिव को प्रसन्न कर लंका ले जा रहे थे. उसी वक्त नीलचक्र पर सवार होकर देवी कामाख्या ने रावण का रास्ता रोक ली. रावण का रास्ता रोके जाने पर देवलोक में देवताओं ने राहत की सांस ली. बाबा बैद्यनाथ मंदिर के बाहर नीलचक्र पत्थर के रूप में स्थापित है. श्रद्धालु भक्ति भाव से इसे भी पूजते हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=380084&action=edit">यह

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