Simdega: कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र के भंवर पहाड़गढ़ में आयोजित लगभग 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रथयात्रा गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के अभूतपूर्व माहौल में संपन्न हुई. मूसलाधार बारिश में भी हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दर्शन और रथ खींचने के लिए उमड़ पड़े. भक्तों की आस्था के आगे बारिश भी फीकी पड़ गई और पूरा क्षेत्र "हरि बोल" तथा "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा.

भगवान श्री जगन्नाथ का भव्य रथ भंवर पहाड़गढ़ मंदिर परिसर से निकलकर कोलेबिरा थाना चौक, रण बहादुर सिंह चौक एवं मार्केट कॉम्प्लेक्स होते हुए मौसीबाड़ी पहुंचा. रथयात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की.

रथयात्रा से पूर्व पुरोहित चिंतामणि पति एवं मनोज पति ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना कराई. यजमान के रूप में अमरनाथ सिंह, तपेश्वर सिंह, अभिमन्यु सिंह एवं बंशीधर सिंह ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया. पूजा के उपरांत भगवान को भोग अर्पित किया गया तथा श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
रथयात्रा के सफल संचालन में अभिमन्यु सिंह, जनेश्वर बिल्हौर, जितन साहू, भीमराम मिस्त्री, दिलेश्वर सिंह, अभिषेक प्रसाद सहित मेला समिति एवं स्थानीय ग्रामीणों की सराहनीय भूमिका रही.
इधर, ऐतिहासिक भंवर पहाड़गढ़ रथ मेले का विधिवत उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष रोज प्रतिमा सोरेंग, प्रखंड प्रमुख दुतामी हेमरोम, उप प्रमुख सुनीता देवी, बानो सर्किल इंस्पेक्टर भिखारी राम तथा अंचल अधिकारी अनूप कच्छप ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया.
इस अवसर पर अतिथियों ने भगवान श्री जगन्नाथ से जिले में सुख, शांति, समृद्धि एवं आपसी भाईचारे की कामना करते हुए सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि भंवर पहाड़गढ़ का ऐतिहासिक रथ मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है.
रथयात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे. रथ के साथ स्कॉर्ट पार्टी, स्टैटिक गार्ड एवं पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. अंचल अधिकारी अनूप कच्छप एवं बानो सर्किल इंस्पेक्टर भिखारी राम लगातार व्यवस्था की निगरानी करते रहे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.
उद्घाटन समारोह एवं रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, मेला समिति के सदस्य एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे. सभी ने इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने और मेले के सफल आयोजन के लिए सामूहिक सहयोग का संकल्प दोहराया.
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