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धनबाद : मुख्यमंत्री श्रमिक योजना में निबंधन 11000, रोजगार मिला सिर्फ दो हजार को

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) शहरी बेरोजगार युवाओं के लिए दो वर्ष पूर्व शुरू मुख्यमंत्री श्रमिक योजना का बंटाधार हो चुका है. इस योजना को लेकर न तो अब निगम के अधिकारी कुछ बोल रहे हैं और न ही नगर विकास विभाग कुछ करने के मूड में है. हालत यह है कि नौकरी के लिए निबंधित 11,000 (ग्यारह हजार) बेरोजगार युवक पलायन के लिए विवश हैं. बेरोजगार युवकों का आरोप है कि जिन ठेकेदारों के पास निगम के अधिकारी काम के लिए भेजते हैं, वह सरकारी रेट से कम पैसे में काम पर रखना चाहता है. साथ ही काम भी अधिक लेना चाहता है. इधर नगर निगम के अधिकारियों ने ज्यादातर काम निजी कंपनियों को दे रखा है,जो अपना मजदूर साथ लेकर आते हैं और रेट भी अपने हिसाब से तय करते हैं. युवकों का कहना है कि ऐसी हालत में कि अन्य राज्यों में नौकरी खोजने के सिवा कोई विकल्प नहीं है.

   अब तक 2000 बेरोजगारों को मिला रोजगार

मुख्यमंत्री श्रमिक योजना अगस्त 2020 में शुरू हुई. योजना शुरू होने पर शहरी बेरोजगार युवकों के बीच नयी आशा का संचार हुआ. उन्हें यकीन था कि अब नौकरी मिल जाएगी. नगर निगम ने ऐसे 11,000 श्रमिकों का निबंधन कर उन्हें जॉब कार्ड भी उपलब्ध कराया. लेकिन काम देने में  फिसड्डी रहा. अब तक मात्र 2000 लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है. रोजगार मांगने आने वाले बेरोजगारों को अब सिर्फ आश्वासन मिल रहा है.

 ऐसा बना था नियम

कोरोना काल में दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस योजना की शुरुआत की थी. मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगारों को 100 दिन काम देने का वादा किया गया था. रोजगार मांगने के 15 दिनों तक काम नहीं मिलने पर हर माह रोजगार भत्ता देने की बात भी कही गई थी. बेरोजगारों को नगर निगम की प्रधानमंत्री आवास योजना, जलापूर्ति, 15 वे वित्त आयोग की राशि से जुड़ी योजनाएं, स्वच्छ भारत अभियान आदि से जोड़ने का सब्ज बाग दिखाया गया था. हालांकि व वादा पूरा नहीं किया जा सका.

 क्या कहते हैं जवाबदेह

नगर मिशन प्रबंधक चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि शुरू में 1000 अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने का काम किया था. धनबाद नगर निगम राज्य का पहला यूएलबी था, जहां 100 दिन का रोजगार श्रमिकों को दिया गया था. इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने शफीक अंसारी नामक श्रमिक को पुरस्कृत भी किया था. अभी 600 श्रमिकों को झमाडा की पानी टंकी से जुड़े कार्य में लगा चुके हैं. इसके अलावा नगर निगम के सिंदरी अंचल में रंगामाटी पार्क के निर्माण में 55 श्रमिकों को काम दिया गया है. अन्य विभागों से भी संपर्क कर रहे हैं. अकुशल श्रमिकों को 385 रुपये दैनिक मजदूरी दी जा रही है. रोजगार उपलब्ध नहीं कराने पर हर माह रोजगार भत्ता भी दिया जा रहा है. सभी निबंधित कमियों को रोजगार देने के लिए ठेकेदारों से संपर्क किया जाता है. लेकिन ठेकेदार बाहर से श्रमिक बुलाकर काम कराने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं. ठेकेदार पर दबाव ऊपर लेवल पर ही संभव है. [wpse_comments_template]

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