जिले के ग्रामीण इलाकों में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था फेल है. जिले के तीन प्रखंडों निरसा, गोविंदपुर व बलियापुर में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के भवन निर्माण का काम 13 साल में भी पूरा नहीं हो पाया. 7 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होने के बाद भी काम अधूरा है. उपयोग व रख-रखाव के अभाव में भवन खंडहर बन गए हैं. वहीं दूसरी ओर, पुराने भवनों में सीएचसी में मरीजों का जैसे-तैसे इलाज हो रहा है. भवन के अभाव में उन्हें जरूरी सुवधाएं नहीं मिल पा रही हैं. नए भवन में सीएचसी शिफ्ट होने से मरीजों को 30 बेड समेत जांच व इलाज की अद्यतन सुविधाएं मिलतीं. सरकार ने जिले में 7 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन की स्वीकृति वर्ष 2008-09 में दी थी. तीन प्रखंडों टुंडी, बाघमारा व तोपाचांची में सीएचसी का नया भवन तैयार हो गया और इसे हैंडओवर भी कर दिया गया है. वहीं, गोविंदपुर और बलियापुर में करीब 8 साल बाद दिसंबर 2017 में निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई. एक सीएचसी पर 3.76 करोड़ रुपए खर्च होने थे. ठेकेदार ने काम भी शुरू कर दिया. गोविंदपुर में भवन निर्माण पर 1.6 करोड़ रुपए और बलियापुर में 1.94 करोड़ रुपए खर्च के बाद विभाग ने प्राक्कलन पर ही सवाल उठा दिए. इसके बाद वर्ष 2018 से काम बंद है. करीब 3.5 करोड़ रुपए खर्च के बाद भवन अधूरा पड़ा है.
निरसा में निर्माण कार्य में मिलीं खामियां, हैंडओवर लटका
निरसा के पांड्रा में सीएचसी के नए भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2012 में लगभग पूरा हो चुका था. मामूली काम बाकी था. करीब 9 वर्ष बाद हैंडओवर की तैयारी शुरू हुई. निरसा विधायक अपर्णा सेनगुप्ता ने विभागीय अधिकारियों के साथ पिछले साल हैंडओवर से पहले भवन का निरीक्षण किया. कई खामियां पकड़ीं. कहा कि पानी, बिजली व सैनेटरी की व्यवस्था नहीं की गई है. उन्होंने इसकी शिकायत धनबाद के डीसी और डीडीसी से की. इससे हैंडओवर लटक गया है. अपर्णा ने बताया कि वर्ष 2008 में जब वह विधायक थीं, तो तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने इसका शिलान्यास किया था. मामूली काम बचे हैं. उन्हें पूरा कर सीएचसी को नए भवन में शिफ्ट कराने का प्रयास किया जाएगा.निरसा के इन क्षेत्रों के लोगों को होता लाभ
निरसा के नवनिर्मित भवन में सीएचसी शुरू होने से निरसा समेत भागाबांध, बेनागढ़िया, सिजुआ, भमाल, बैजना, पांड्रा पश्चिम, पांड्रा पूरब, खुशरी, उपचूड़िया, घाघरा, सोनबाद, पलारपुर, मदनडीह, वीरसिंहपुर की करीब एक लाख की आबादी को इलाज की सुविधा मिलेगी.क्या कहते हैं स्थानीय लोग
निरसा निवासी सुनील कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र की इमारत बनकर तैयार है, लेकिन शिफ्टिंग नहीं हुई है. देखरेख के अभाव में भवन धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है. वहीं, बलियापुर के दीपक गोराई ने बताया कि बलियापुर ग्रामीण बहुल इलाका है. गंभीर स्थिति में सीएचसी बगल में होने के बावजूद मरीज को एसएनएमएमसीएच जाना पड़ रहा है. नए सीएचसी के शुरू होने से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी. उधर, गोविंदपुर के रहने वाले साजिद ने बताया कि काम बंद होने से अधूरे पड़े सीएचसी भवन की दीवारें जर्जर होती जा रही हैं. नए भवन में सीएचसी शुरू होने से गोविंदपुर और आसपास के ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलती.इधर, तोपचांची सीएचसी में न डॉक्टर न दवा
तोपचांची सीएचसी में डॉक्टर व दवाओं की कमी के कारण मरीजों का ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा है. जिला परिषद सदस्य विकास कुमार महतो ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है. महतो ने कहा कि तोपचांची प्रखंड की डेढ़ लाख की आबादी के लिए चिकित्सा सुविधा के नाम पर महज एक सीएचसी है, जो नेशनल हाइवे के बगल में है. क्षेत्र के अधिकतर लोग मजदूर, किसान व गरीब वर्ग से आते हैं. पूरी आबादी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए इसी सीएचसी पर निर्भर है. डॉक्टर व दवा की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों का ठीक से इलाज नहीं हो पाता. सर्दी-बुखार व मामूली चोट-चपेट वाले मरीजों को भी धनबाद रेफर कर दिया जाता है. एनएच से सटे होने के कारण इलाके में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं. तोपचांची सीएचसी में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार घायलों की जान गंवानी पड़ी है.खामियां दूर होने के बाद लेंगे हैंडओवर : सिविल सर्जन
धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. श्याम किशोर कांत ने बताया कि निरसा सीएचसी के भवन निर्माण में कई खामियां पाई गई थीं. जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग ने भवन को हैंडओवर नहीं लिया. खामियां दूर कर भवन को दुरुस्त करने के बाद ही हैंडओवर लिया जाएगा. विभाग इस दिशा में प्रयासरत है. जहां तक तोपचांची सीएचसी की बात है, तो वह नए भवन में चल रहा है. डॉक्टर मरीजों का नियमित इलाज कर रहे हैं. यह भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-movement-continues-after-death-in-the-grip-of-highway-transport-of-mpl-stalled/">धनबाद:हाइवा की चपेट में मौत के बाद आंदोलन जारी, एमपीएल की ट्रांसपोर्टिंग ठप [wpse_comments_template]

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