अस्पताल प्रबंधन ने दिखाई तत्परता
एकाएक इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को देख अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल स्टूडेंट सहित सभी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ को इलाज में लगा दिया. हालांकि अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरी तत्परता से हालात को संभाला. गुरुवार की सुबह तक 100 से अधिक लोगों काइलाज चलता रहा. दर असल बलियापुर प्रखंड के करमाटांड़ पंचायत के हुचूक गांव में भोक्ता मेला लगा था. शाम में महिला, पुरष और बच्चों ने गोल गप्पे, छोला बटूरा और चाट खाया था. रात 10 बजते ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी. आधी रात होते-होते अस्पतालों के बेड भर गए. जिन्हें जहां जगह मिली, चिकित्सक इलाज में लग गए. हालांकि शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष उमेश कुमार ओझा ने गुरुवार 20 अप्रैल को बताया कि दो को छोड़ अधिकसंख्य मरीजों को रिलीज कर दिया गया है. [caption id="attachment_614440" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="169" /> एक ही बेड पर दो मरीजों का हो रहा इलाज[/caption] बता दें कि शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी वार्ड बुधवार की रात्रि मरीजों से भर गया. बीमारों में 1 वर्ष के बच्चे से लेकर 90 वर्ष तक के वृद्ध शामिल थे. इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के एक साथ आने पर एसएनएमएमसीएच में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई. अधिकतर मरीजों का इलाज जमीन पर लिटा कर किया गया.
चाट गुपचुप और छोला बटुरा खाकर पड़े बीमार
[caption id="attachment_614443" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="135" /> जमीन पर बिठा कर बच्चों को चढ़ाया जा रहा स्लाइन[/caption] ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार 19 अप्रैल को गांव में भोक्ता मेला लगा था, जिसमें करमाटांड़ पंचायत सहित आसपास की कई पंचायतों के लोग पहुंचे थे. मेले में शाम 4:00 से 6:00 के बीच बड़ी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चों ने एक ठेला पर गुपचुप, चाट और छोला-भटूरा खाया. जिन जिन लोगों ने खाया था उनकी तबीयत शाम होते ही बिगड़ने लगी. देखते ही देखते एसएनएमएमसीएच का इमर्जेंसी वार्ड मरीजों से खचा खच भर गया.

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