Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

धनबाद:  सदर अस्पताल में धूल फांक रहे हैं 43 लाख के 85 बेड

Ravi Chourasia Dhanbad : अस्पतालों में अमूमन मरीजों की संख्या बढ़ जाती है तो उसे बेड नहीं मिलता. कभी जमीन पर तो कभी स्ट्रेचर पर लिटा कर डॉक्टर इलाज करते हैं. इधर लोग अस्पताल की अव्यवस्था व साधनहीनता को कोसते रहते हैं. परंतु धनबाद में एक ऐसा अस्पताल भी है, जहां बेड इधर उधर पड़े टूटने-फूटने के कगार पर हैं. यानी मरीज से ज्यादा बेड. सवाल उठता है कि क्या बीमारी घट गई है या बीमार लोगों ने अस्पताल आना छोड़ दिया है. इस सवाल का जवाब तो किसी के पास नहीं, मगर धनबाद कोर्ट मोड़ स्थित सदर अस्पताल में बेकार पड़े अत्याधुनिक 85 बेड प्रबंधन की लापरवाही, अव्यवस्था और कुप्रबंध की कहानी जरूर बयां कर रहे हैं.

  खाली बेड का गोदाम बन गया है अस्पताल

वर्ष 2018 में जब सदर अस्पताल का कामकाज शुरू हुआ तो उस समय 60 बेड थे. फिर कोरोना काल में कोविड वार्ड बना और जरूरत के मुताबिक जिला प्रशासन की ओर से अस्पताल को लगभग 43 लाख रुपये की लागत से अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराया गया. अस्पताल में बेड की संख्या 60 से बढ़ कर 100 हो गयी. मगर लगभग 85 बेड अब तक अस्पताल में बेकार पड़े है. मरीज से ज्यादा बेड अस्पताल के बरामदे पर जहां-तहां पड़े हैं. देखा जाए तो सदर अस्पताल खाली पड़े बेड का गोदाम बन कर रह गया है.

   35 से 75 हजार रुपये मूल्य बेड कब तक रहेंगे बेकार

अस्पताल के बेकार 85 बेड में कुछ नार्मल हैं. कई हाइड्रोलिक व इलेक्ट्रिक बेड भी हैं, जिसकी कीमत 35,000 से 75,000 तक बताई जा रही है.   कुल मिलाकर लगभग 43 लाख रुपये के बेड कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं. परंतु अस्पताल प्रबंधन को कोई लेना-देना नही है. सदर अस्पताल में 100 बेड जरूरत के हिसाब से अलग अलग इंडोर सेवा के लिए बांटे गए हैं, जिसमे गायनी, ओटी, चाइल्ड, ऑर्थो, सर्जरी समेत अन्य विभाग शामिल है. शेष बेकार पड़े 85 बेड अस्पताल के बरामदे में रख दिये गए हैं. अस्पताल के बरामदे में रखे गए ये बेड दिन ब दिन खराब हो रहे हैं. अगर शीघ्र ही उन्हें काम में नहीं लाया गए तो वे कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे.

  शीघ्र ही अन्य सेवाओं में होगा बेड का इस्तेमाल: उपाधीक्षक

जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में पैलिएटिव केयर, टीवी डॉट्स सेंटर सहित कई अन्य इंडोर सेवाएं शुरू होनेवाली थी, जिनमें ये बेकार पड़े बेड काम में लाये जानेवाले थे. परंतु स्वास्थ्य विभाग और प्रबंधन की लेटलतीफी के कारण अबतक ये सेवाएं शुरू नही हो सकी हैं. फलस्वरूप अस्पताल के बरामदे में पड़े ये बेड अब कबाड़खाने की शोभा बनने की ओर अग्रसर हैं. हालांकि अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ संजीव प्रसाद का कहना है कि तमाम बेड अस्पताल में सुरक्षित रख दिये गए हैं. कुछ अन्य सेवाएं शुरू होनेवाली है, जिसमें उनका इस्तेमाल किया जाएगा. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही