एक मामले में जमानत मिली तो दूसरे में अरेस्ट
दरअसल 19 जुलाई को हाई कोर्ट से राकेश ओझा से रंगदारी मांगने के मामले में जमानत मिलने के बाद पुलिस ने कोर्ट में आवेदन देकर पुराने गबन के एक मामले में अरूप चटर्जी को रिमांड करने की मांग की. उसके आधार पर अदालत ने अरूप चटर्जी को पेश करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के आलोक में जेल प्रशासन ने उन्हें कोर्ट में पेश किया. जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया.चिटफंड कंपनी के एजेंट ने ही की थी एफआइआर
लोयाबाद के रहने वाले मनोज पंडित की शिकायत पर केयर ग्रुप ऑफ कंपनी के डायरेक्टर अरूप चटर्जी और राकेश सिन्हा के विरुद्ध पुटकी थाना कांड संख्या 91/18 दर्ज की गई थी. प्राथमिकी के अनुसार कंपनी ने लुभावने स्किम का प्रलोभन देकर कंपनी में रुपया जमा करने का प्रचार किया और लोगों का रुपया कंपनी में जमा कराने लगा. मनोज भी कंपनी का एजेंट था.नौ लाख रुपये हड़प कर भागने का आरोप
उसने कंपनी के प्रलोभन में आकर कई लोगों का पैसा कंपनी में जमा कराया. जब काफी रुपया जमा हो गया तो कंपनी पैसा लौटाने में आना-कानी करने लगी और बैंक मोड़ स्थित ऑफिस को बंद कर भाग गई. मनोज ने आरोप लगाया था कि कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक ने लोगों से करीब 9 लाख रुपये गबन करने के उद्देश्य से जमा कराया और कंपनी बंद कर भाग गए. यह भी पढ़ें: अरुप">https://lagatar.in/police-raid-on-the-premises-of-arup-chatterjee-and-coal-dealer-manager-rai/">अरुपचटर्जी और कोयला व्यवसायी मैनेजर राय के ठिकानों पर पुलिस का छापा [wpse_comments_template]

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