Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) रांड़, सांड़, सीढ़ी, संन्यासी, इनसे बचे सो सेवई काशी, यह कहावत मौजूदा समय में परेशानी का सबब बन चुके शहर के सांड़ों पर सटीक बैठता है. सड़क, हाट, बाजार और गल्ली मुहल्लो में विचरण करने वाला यह पशु गर्मी बढ़ने के साथ आक्रामक हो चुका है. पता नहीं कब किस पर हमला हो जाए. इधर नगर निगम का सांड़ पकड़ने का अभियान भी बंद हो चुका है. पलामू से आई एजेंसी वापस जा चुकी है. नगर आयुक्त सतेंद्र कुमार का गोशाला का फार्मूला फेल होने के बाद अब सांड़ को काबू करने के लिए नए सिरे से चिंतन हो रहा है. हालांकि नई पहल कब शुरू होगी, कहना मुश्किल है. मतलब सांड़ के हमले से बचने के लिए अब खुद से बचाव करने के अलावा कोई फार्मूला नहीं है.
पिछले दो दशक से है सांड़ का आतंक
धनबाद शहर में सांड़ का आतंक दो दशक पुराना है. हालांकि छिट पुट घटनाओं के कारण लोग इसे अनदेखा कर रहे थे. परंतु इधर दिन ब दिन उनकी संख्या में बढ़ोतरी होने के साथ लोगों की परेशानी भी बढ़ गई. हर दिन दर्जनों लोग सांड़ के हमले के शिकार हो रहे हैं. पिछले एक साल में 10 से अधिक लोग जान भी गंवा चुके हैं. दरअसल सांड़ कही बाहर से नहीं आ रहे हैं. चारों तरफ फैले पशुपालक गाय के बछड़े को सांड़ बनने के लिए खुला छोड़ देते हैं. वही बछड़ा बड़ा होकर सांड़ बन जाता है और भूख बढ़ती है तो लोगों पर हमला भी करता है. बगैर तैयारी निगम ने शुरू किया था अभियान
सांड़ को लेकर नगर निगम में व्यवसायी, समाजसेवी लगातार शिकायत करते आ रहे हैं. इसी को ध्यान में रख कर 10 दिन पूर्व निगम के अधिकारियों ने पलामू की एक एजेंसी को काम सौंपा था. हालांकि बिना किसी तैयारी के यह अभियान महंगा पड़ा. टीम ने एक सांड़ को पकड़ कर बस्तकोला गोशाला में रखा भी. मगर उसके अगले ही दिन बेड़ा तोड़ कर वहा से भाग निकला. गोशाला को भी नुकसान पहुंचाने का काम किया. इसके बाद गोशाला के कर्मी उग्र हो गए. उन्होंने निगम के कार्यों का विरोध किया. दुबारा सांड़ रखने पर काम छोड़ने की चेतावनी दी. उसके बाद ही निगम के अधिकारी शांत हो गए. स्ट्रेस के कारण सांड़ हो जाते है उग्र : धीरज कुमार
पशु चिकित्सक डाक्टर धीरज कुमार ने बताया कि गर्मी में खाने पीने की कमी हो जाने या प्यास बढ़ने के कारण पशु उग्र हो जाते हैं. कई बार ज्यादा स्ट्रेस के कारण भी ये गुस्सैल हो जाते हैं और आस पास से गुजरने वाले लोगों पर अचानक हमला कर देते हैं. लोगों को अपने आस पास रहने वाले पशुओं की चिंता करने की जरूरत है. जहां तक हो सके, उन्हे भोजन उपलब्ध कराना चाहिए. गर्मी में कम से कम उन्हें पानी जरूर पिलाएं. ऐसा करने से भी उनके स्वभाव में बदलाव आता है.हालांकि लंबे समय तक खुले में रहने वाले पशुओं को एक स्थान पर रखना भी आसान नहीं है. जहां तक जानकारी है, निगम की ओर से स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. अभियान नहीं, ट्रायल था: सहायक नगर आयुक्त
सहायक नगर आयुक्त प्रकाश कुमार ने कहा कि सांड़ पकड़ने का अभियान शुरू नहीं हुआ था. एक दो दिन सिर्फ ट्रायल हुआ है. गोशाला के लोगों के विरोध के कारण ट्रायल बंद करना पड़ा. उनके स्थायी समाधान के लिए प्रयास चल रहा है. [wpse_comments_template]
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