Nirsa : कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता ,एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो, इस कहावत को चरितार्थ किया है निरसा फटका 4 नंबर कॉलोनी में रहने वाली राजमिस्त्री आसमा खातून ने. बुलंद हौसला लिए आसमा खातून बताती है कि वर्ष 2006 में पति सुकू अंसारी के तलाक देने के बाद अकस्मात उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. अपने दुधमुंहे बच्चे को लेकर मायके चली आई. बच्चे का लालन-पालन बड़ी चुनौती थी. उसने अपने पैर पर खड़े होने की ठानी और राजमिस्त्री के साथ करीब 15 वर्ष तक ईट-पत्थर, सीमेंट, बालू आदि ढोया. अनपढ़ होने के बावजूद उसने इंच, फिट आदि के बारे में देख-देखकर जानकारी प्राप्त की और राजमिस्त्री का काम शुरू किया. पिछले करीब 5 वर्षों से वह राजमिस्त्री का काम कर रही है. उसके अधीन 7 से 8 मजदूर खट रहे हैं, जिनकी रोजी-रोटी उसी के सहारे चल रही है. वह निरसा क्षेत्र की पहली महिला राजमिस्त्री है. अपने इकलौते बेटे असगर अंसारी को आठवीं तक पढ़ाया. असगर अब 17 साल का हो गया है और तमिलनाडु में काम कर रहा है. आसमा ने अपनी भतीजी को गोद ले रखा है.
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लगन व हौसले से सबकुछ हासिल कर सकते हैं
आसमा खातून कहती है कि यदि लगन हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं है. मैं अनपढ़ थी, लेकिन सीखने की ललक की वजह से आज राजमिस्त्री का काम कर रही हूं. कितनी भी परेशानी हो, लेकिन हिम्मत नहीं हारना चाहिए. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=284143&action=edit">यहभी पढ़ें : गया-धनबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस से उठा धुआं, यात्री परेशान [wpse_comments_template]
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