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धनबाद : बीबीएमकेयूटीए को यूजीसी से विकास अनुदान नहीं मिलने पर चिंता

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अधिकारियों की निष्क्रियता व कुलपति के शिक्षक विरोधी रवैये पर भी रोष

Dhanbad : बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बीबीएमकेयूटीए) ने यूजीसी से विकास अनुदान प्राप्त करने में विश्वविद्यालय अधिकारियों की निष्क्रियता पर गंभीर चिंता प्रकट की है. 26 जुलाई को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में बीबीएमकेयूटीए कार्यकारिणी समिति की बैठक में शामिल शिक्षकों ने जिक्र किया कि यूजीसी से आईआईटी-आईएसएम को विकास परियोजनाओं के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं. बीबीएमकेयू अधिकारी विकास कार्यों के लिए 10 प्रतिशत फंड लाने में भी विफल रहे.

  दो वर्ष बाद हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक

दो वर्ष से ज्यादा समय के बाद 26 जुलाई को कार्यकारिणी समिति की बैठक बीबीएमकेयूटीए अध्यक्ष डॉ. आरके तिवारी की अध्यक्षता में हुई. बैठक में बीबीएमकेयूटीए महासचिव डॉ. हिमांशु शेखर चौधरी, सचिव डॉ. कृष्ण मुरारी, प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र आर्यन, बीबीएमकेयू पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स एसोसिएशन (पीजीटीए) के अध्यक्ष डॉ. भगवान पाठक, कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार, डॉ. लीलावती कुमारी, डॉ. कल्पना प्रसाद भी मौजूद थे. बैठक में बीबीएमकेयूटीए (डॉ. बीएन सिंह गुट) के पूर्व महासचिव और विनोबा भावे विश्वविद्यालय (वीबीयू) हजारीबाग के पूर्व महासचिव डॉ. बीएन सिंह, डॉ. इंद्रजीत कुमार, डॉ. संजय सिंह प्रोफेसर डीके चौबे और डॉ. एमके सिंह भी मौजूद थे.

  डॉ हिमांशु और डॉ. बीएन सिंह गुट का विलय

दिलचस्प बात यह रही कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों को कथित तौर पर बंधक बनाने का आरोप लगाकर मोर्चा खोलने वाले पीजीटीए के महासचिव डॉ. डीके सिंह अनुपस्थित रहे. बीबीएमकेयूटीए के प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र आर्यन ने बताया कि बैठक में सिर्फ तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिसमें डॉ हिमांशु शेखर चौधरी और डॉ. बीएन सिंह गुट का विलय कर दिया गया. इसके अलावा अगले माह कार्यकारिणी समिति की बैठक  करने और सितंबर के तीसरे सप्ताह में बीबीएमकेयूटीए का चुनाव कराना शामिल है.

 एकजुट होकर कुलपति के आदेश का होगा विरोध

एक वरिष्ठ शिक्षक ने बताया कि बैठक में विश्वविद्यालय के शिक्षक विरोधी रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में अनुकूल शैक्षणिक माहौल बनाने की बजाए कुलपति ने शिक्षकों को तबादला कर दमनकारी रवैया अपना रखा है. जो उनकी नजर में फिट नहीं बैठते और उनके आदेशों का खुला विरोध करते हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ शिक्षक ने बताया कि बैठक में सभी प्रतिभागी शिक्षकों ने एकजुट होकर कुलपति के आदेश का विरोध करने का फैसला लिया. [wpse_comments_template]

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