एक दूसरे पर होता रहा है दोषारोपण
अब तो अंदर तहखाने के जानकार भी कहने लगे हैं कि कोल माइंस एरिया में अवैध खनन, कोयला चोरी, रंगदारी, वर्चस्व और हिंसक वारदात पर अंकुश लगाना जिला प्रशासन और बीसीसीएल के वश की बात नहीं रह गई है. दिक्कत इस कदर बढ़ गई है कि जिला प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे पर दोषारोपण करने भी नहीं झिझकते. पिछले कई माह से यह सिलसिला जारी है. विगत वर्ष के नवंबर में उपायुक्त कार्यालय से एक पत्र जारी हुआ था, जिसमें कहा गया था कि बीसीसीएल ने कोयला चोरी रोकने के लिए सुझाए गए उपायों का अनुसरण नहीं किया. जवाब में बीसीसीएल प्रबंधन ने भी सफाई पेश की थी.अवैध खनन पूरी तरह रोकना संभव नहीं
विगत 14 नवंबर से शुरू यह शीत युद्ध अभी थमा नहीं है. बीसीसीएल के सीएमडी समीरन दत्ता ने एक बार फिर एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जिले में अवैध खनन रोकना स्थानीय प्रशासन का काम है. सीआईएसएफ के बलबूते कोल माइंस के एरिया में अवैध खनन को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है. ऐसे कोल एरिया प्रबंधक को जब भी कोयले के अवैध खनन की जानकारी मिलती है, सीआईएसएफ की मदद से अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई होती है और अवैध मुहाने को ओवर बर्डन से बंद कराया जाता है. बावजूद इसे पूरी तरह बंद करने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सक्रियता बढानी होगी. तभी कोयला चोरी और हिंसा पर पूरी तरह रोक लग सकती है.क्या है मामला
वर्ष 2022 में कोयला चोरी और अवैध खनन को लेकर जिला प्रशासन की जमकर किरकिरी हुई थी. हालांकि जिला प्रशासन ने अवैध खनन का जिम्मेवार बीसीसीएल प्रबंधक को ठहराया था. 14 नवम्बर 2022 को डीसी ने बीसीसीएल के सीएमडी और कोल इंडिया प्रबंधन को पत्र लिखा था, जिसमें राष्ट्रीय संपत्ति की लूट पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे रोकने के कई उपाय बताए गए थे. पत्र के आलोक में बीसीसीसीएल के सीएमडी ने 25 नवम्बर को पांच सदस्यीय टीम के गठन का आदेश दिया. टीम में सीएमडी के तकनीकी सचिव जितेंद्र मलिक, महाप्रबंधक (सुरक्षा) एमएस पांडे, यूबी सिंह, विद्युत साह आदि को शामिल किया गया. उन्हे पत्र का अध्ययन कर ज़वाब तैयार करने को कहा गया. टीम ने पत्र तैयार कर डीसी कार्यालय को सौंपा है.बड़े पैमाने पर कार्रवाई जिला प्रशासन करे: बीसीसीएल
डीसी को दिए गए जवाब में कहा गया है कि अवैध खनन का काम बंद खदानों से होता है. अलग अलग सीम के मुहाने में संकरा गलियारा बनाकर कोयले की चोरी होती है. अवैध खनन का काम चालू खदानों से नहीं होता है. बंद खदानों को पूरी तरह नहीं बंद किया जाता है, क्योंकि भविष्य में यहां से खनन की संभावना बनी रहती है. कोल एरिया का बड़ा क्षेत्र होने के कारण सभी मुहानों की निगरानी सीआईएसएफ के बलबूते संभव नहीं है. बड़े पैमाने पर कार्रवाई जिला प्रशासन को ही करनी चाहिए.बीसीसीएल के पत्र की जानकारी नहीं : एसडीओ
इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी प्रेम कुमार तिवारी से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने सीधे इनकार कर दिया. कहा कि उन्हें बीसीसीएल के लेटर की जानकारी नहीं है. किस संदर्भ में कौन सी बात कही गई, अध्ययन के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/after-girl-students-danced-in-the-forest-feast-of-binod-bihari-mahato-inter-womens-college/">धनबाद:बिनोद बिहारी महतो इंटर महिला कॉलेज के वन भोज में थिरकीं छात्राएं [wpse_comments_template]

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