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धनबाद : आरोपी को जेल भेजने से पहले देने होंगे पुख्ता सबूत- मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी

Dhanbad : झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर रविवार को सिविल कोर्ट धनबाद में जिला स्तरीय मल्टी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला का उद्घाटन प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह समेत अन्य न्यायााधीशों ने संयुक्त रूप से किया. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला ने नए अपराधिक कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को इसका कठोरता से पालन करना होगा. अब किसी भी व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले पुलिस को कोर्ट के समक्ष उसके अपराध के संबंध में पुख्ता साक्ष्य पेश करना होगा. अन्यथा उसे जेल नहीं भेजा जा सकता. प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटना के मामलों में समय पर कागजात कोर्ट में जमा नहीं किए जाने से मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिल पाता है. उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए दुर्घटना के 30 दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. अन्यथा थाने के जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने कहा कि दुष्कर्म पीड़िताओं की गरीमा बनाए रखने में न्यायपालिका व पुलिस का अहम रोल है. कार्यशाला में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय तौफीकुल हसन, डालसा सचिव सह अवर न्यायाधीश राकेश रोशन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीकांत पाठक, स्वयंभू प्रफुल्ल कुमार, पारस कुमार सिन्हा, साकेत कुमार, ट्रैफिक डीएसपी अरविंद कुमार सिंह आदि ने विचार रखे. मौके पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र सहाय, महासचिव जीतेंद्र कुमार, लोक अभियोजक अवधेश कुमार, अपर एवं सहायक लोक अभियोजक डॉ राजीव कुमार, विभिन्न थानों के थाना पदाधिकारी, पारा लीगल वालंटियर आदि  उपस्थित थे. यह भी पढ़ें : रांची:">https://lagatar.in/independent-mla-saryu-rai-joins-jdu/">रांची:

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