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धनबाद : बंगाली समाज ने की लखी पूजा, कार्तिक मास की हुई शुरुआत

Nirsa : निरसा (Nirsa) बंगाली समुदाय ने रविवार 9 अक्टूबर को लखी पूजा का आयोजन किया. इसे विशेष रूप से कोजागरी लखी पूजा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन बंगाली समाज मां की प्रतिमा मंडप में स्थापित करते हैं और घर में भी विशेष पूजा की जाती है. शरद पूर्णिमा को क्षेत्र में लक्खी पूजा विशेष महत्व है. आम तौर पर दीपावली के दिन देश में लक्ष्मी पूजा की जाती है. परंतु बंगाली समाज शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजा मनाते हैं. इसे लखी पूजा भी कहा जाता है. इस दिन लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा होती है

   लखी पूजा की क्या है मान्यता

मान्यता के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक में विचरण करती हैं. इसी कारण से इस दिन कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है. लोग इसका लाभ लेने के लिए छत पर या खुले में खीर रखकर अगले दिन सुबह उसका सेवन करते हैं. कुछ लोग चूडा एवं दूध भी भिगोकर रखते हैं. रातभर इसे चांदनी में रखने से इसकी तासीर बदलती है और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. इस दिन खीर का महत्व इसलिए भी है कि यह दूध से बनी होती है और दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है. चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है. इस पूर्णिमा की रात चांदनी सबसे ज्यादा तेज प्रकाश वाली होती है. [wpse_comments_template]    

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