Nirsa: निरसा (Nirsa) शहीद भगत सिंह की शहादत दिवस पर 23 मार्च गुरुवार को मासस ने रैली निकाली. रैली में शामिल लोगों ने निरसा प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित शहीद भगत सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण किया. इस अवसर पर पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि शहीद ए आजम भगत सिंह ने अंग्रेज सरकार के दांत खट्टे कर दिए थे. 14 वर्ष की आयु में भगत सिंह ने सरकारी स्कूलों की पुस्तक और कपड़े जला दिए थे. इसके बाद उनके पोस्टर गांव में छपने लगे. 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में राजगुरु के साथ मिलकर अंग्रेज सरकार के सहायक पुलिस अधीक्षक जे पी सांडर्स को मार दिया था. 8 अप्रैल 1929 को क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत के तत्कालीन सेंट्रल असेंबली के सभागार में सरकार को जगाने के लिए बम और पर्ची फेंके. चौरी- चौरा हत्याकांड के बाद गांधी जी ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भगत सिंह पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में गठित गदर दल का हिस्सा बन गए. चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल आदि क्रांतिकारियों के साथ मिलकर 9 अगस्त 1925 को काकोरी स्टेशन पर सरकारी खजाना को लूट लिया गया य यह घटना काकोरी कांड के नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है. भगत सिंह क्रांतिकारी होने के साथ अध्ययनशील, विचारक, कलम के धनी, दार्शनिक, चिंतक, लेखक व पत्रकार भी थे. उन्होंने अकाली और कृति दो अखबारों का संपादन भी किया था. 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई. फांसी पर जाने से पहले वह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे. श्रद्धांजलि देनेवालों में आगम राम, दिल मोहम्मद, गोपाल दास, टूटू मुखर्जी, मुमताज अंसारी सहित भारी संख्या में मासस कार्यकर्ता शामिल थे. [wpse_comments_template]
धनबाद: भगत सिंह क्रांतिकारी ही नहीं, चिंतक व विचारक भी थे : अरूप चटर्जी
Last Updated: Mar 23, 2023 12:00 AM (IST)