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धनबाद : भागवत कथा मनुष्य को इस भवसागर से तार देती है -गोस्वामी

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Dhanbad : पुराना बाजार के शंभूराम धर्मशाला में श्री राधाबल्लभ सत्संग समिति एवं मारवाड़ी युवा मंच आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का 23 अगस्त को समापन हो गया. कथावाचक श्रीहित प्रतापचन्द्र गोस्वामी कथा के अंतिम दिन ने कहा कि जो जीव श्रीमद्भागवत कथा पुराण का श्रवण करता है, उसका अंत: करण शुद्ध हो जाता है. पाप नष्ट हो जाते हैं. सात दिनों की कथा सुनना तभी सार्थक माना जाता है, जब हम भगवान द्वारा बताए गए रास्तों पर चलते हैं. यह कथा मनुष्य को इस भवसागर से तार देने वाली है. सप्तम दिवस की कथा अति महत्वपूर्ण है, जो किसी कारणवश सातों दिन कथा में नहीं आ पाते, अगर वे एकाग्रचित होकर पूरे भक्ति भाव से सप्तम दिवस की कथा श्रवण करें, तो उन्हें सभी दिवस की कथा श्रवण का फल प्राप्त होता है. उन्होंने कहा कि सनातनी होना सौभाग्य है. हमारे यहां ईश्वर के साथ-साथ प्रकृति को भी पूजा जाता है. लेकिन आज के समय में सनातनी अलग-थलग हो रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है. हम सभी सनातनियो को एकजुट होकर हिन्दू धर्म को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे हमारी अति प्राचीन संस्कृति सुरक्षित हो सके. सभी को ईश्वर की पूजा करना चाहिए, जिससे आत्मिक शक्ति भी प्राप्त होती है. गोस्वामीजी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा की सच्चा मित्र वही होता है, जो विपत्ति के समय अपने मित्र के काम आए. श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता संसार में अमर है. उन्होंने कहा कि जीवन अकल्पनीय है. सदा सत्कर्म करते रहना चाहिए और भाग्य के भरोसे न रहकर पूरी लगन से मेहनत करनी चाहिए. यह भी पढ़ें : झूमते-गाते">https://lagatar.in/dhanbad-offered-to-shyam-baba-while-dancing-and-singing-103-nisan/">झूमते-गाते

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