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धनबाद : कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्री हरि का स्वरूप है-कृष्णप्रियाजी

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Dhanbad : जोड़ाफाटक शक्ति मंदिर में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा में 8 अगस्त को कथावचिका कृष्णप्रियाजी ने कहा कि  सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती हैं. कहा कि जब हम प्रभु को अपना सर्वस्व सौंप देते हैं, तो जीवन में रास घटित होता है. महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का मिलन हुआ. जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है. कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि सांदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव-गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना इत्यादि कथाओं का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया. कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्री हरि का स्वरूप है. इसे सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं परंतु मानव प्राणी को यह कथा सहज ही प्राप्त हो जाती है. कृष्णप्रियाजी ने कहा कि आजकल के लोग भगवान कृष्ण व उनकी लीलाओं को मानवी समझते हैं और वे बेफिजूल वाद-विवाद करते हैं. वे अपनी मति के अनुसार ही भगवान की चीरहरण लीला, माखनचोरी लीला, गोवर्धन लीला, रासलीला इत्यादि लीलाओं का अर्थ समझते हैं लेकिन वे इन लीलाओं के पीछे छिपे गुण रहस्यों को समझने का प्रयास नहीं करते. भगवान की हर लीला के पीछे भक्तों का उद्धार और कोई विशेष संदेश छिपा होता है, जिसे केवल भागवत कथा द्वारा व प्रेम द्वारा ही समझा जा सकता है. भगवान के साथ सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है. दृष्टांत के माध्यम से समझाया कि भीलनी माई, धन्ना जाट, कर्मा बाई, नरसी भक्त जैसे अनेकों भक्तों ने किसी विद्यालय से विद्या प्राप्त नहीं की थी, लेकिन उनकी प्रभु के साथ सच्ची प्रीति थी. इस प्रीति से ही उनके अंदर ज्ञान प्रकट हुआ. वह सभी भक्त शिरोमणि बनकर विश्व में विख्यात हुए. यह भी पढ़ें : अभया">https://lagatar.in/dhanbad-allegation-of-irregularity-in-teacher-reinstatement-in-abhaya-sundari-middle-school-complaint-to-dc/">अभया

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