Dhanbad : मारवाड़ी युवा मंच एवं श्री राधा बल्लभ सत्संग समिति के द्वारा पुराना बाजार के शंभू धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन 21 अगस्त को श्रीहित प्रतापचंद्र गोस्वामी ने कहा कि जहां भागवत कथा होती है, वहां पर उस समय सारे तीर्थ, सारी नदियां, सारे देवता विचरण करते हैं. श्रीमद् भागवत कथा कल्पतरू की तरह है, जिसकी शरण में बैठने पर सारी मनोकामनाएं पूरी होती है. भागवत कथा में जो व्यक्ति जिस मंशा के साथ बैठता है, उसकी वह मनोकामना पूर्ण होती है, लेकिन व्यक्ति की भावना पवित्र हो और संसार के मंगल की कामना उसके मन में हो. श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि कथा का पंचम दिवस अत्यधिक मनोहर होता है. क्योंकि इसमें नटखट बाल कृष्ण की लीलाओं का श्रवनपान कराया जाता है. भगवान कृष्ण का अवतार पूर्ण ब्रह्म का है इसलिए उन्होंने बाल्यावस्था से ही कंस द्वारा भेजे गए भयानक राक्षसों का संहार किया. कथा व्यास ने कृष्ण जन्म कथा के बाद कथा को आगे बढ़ाते हुए पूतना वध, यशोदा मां के साथ बालपन की शरारतें, भगवान श्रीकृष्ण का गौ प्रेम, कालिया नाग मानमर्दन, चीर हरण, माखन चोरी प्रसंग सहित अन्य कई प्रसंगों का कथा के दौरान वर्णन किया. कलियुग की महिमा बताते हुए कहा कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है. कलयुग में हरी नाम से ही जीव का कल्याण हो जाता है. कलयुग में ईश्वर का नाम ही काफी है. सच्चे हृदय से हरि नाम के सुमिरन मात्र से कल्याण संभव है. इसके लिए कठिन तपस्या और यज्ञ आदि करने की आवश्यकता नहीं है. जबकि सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में ऐसा नहीं था. यह भी पढ़ें : जान">https://lagatar.in/dhanbad-100-families-forced-to-live-in-the-submerged-area-liloripathra-putting-their-lives-at-risk/">जान
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