Dhanbad : भारत को वर्ष 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर व वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन एमिशन देश बनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन जरूरी तत्व है. इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आईआईटी-आईएसएम, धनबाद में सेंटर ऑफ़ हाईड्रोजन एंड कार्बन कैप्चर स्टोरेज एंड यूटिलाइजेशन टेक्नोलॉजीज पर कार्यशाला हुई. इसमें विशेषज्ञों ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्सर्जन पर विचार-मंथन किया. ज्ञात हो कि केंद्र सरकार आईआईटी धनबाद की देखरेख में पूर्वी क्षेत्र में हाईड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर स्थापित करने की तैयारी में है. यह क्लस्टर आईआईटी के निरसा परिसर में बनेगा. इसमें आईआईटी सहित एनआईटी, राज्य के विश्वविद्यालय, सीएसआईआर लैब्स, प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों व स्टार्टअप्स की अहम भूमिका होगी. इससे पूर्व सीएचसीसीयूएसटी के हेड संदीपन कुमार दास ने कार्यशाला का उद्घाटन किया. कार्यशाला में आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर, डॉ रंजीत कृष्ण, प्रधान वैज्ञानिक राहुल कुलश्रेष्ठ, सीएसआईआर हैदराबाद के डॉ उज्जवल पाल, आईआईटी कानपुर के प्रो शांतनु डे, आईआईटी धनबाद के प्रो अरुण कुमार सामंत, रंजू गोपाल बर्मन, आईआईटी पटना के प्रो सुशांत कुमार, प्रो सिद्दार्थ सेनगुप्ता, प्रो गणेश चंद्र नायक, सीएसआईआर धनबाद के डॉ संतोष एम, टाटा स्टील के डॉ प्रतीक स्वरूप दास, टेक्निप एनर्जिज के उग्रसेन यादव ने भाग लिया. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-committee-honored-police-officers-in-harina/">धनबाद
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धनबाद : निरसा में हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर विकसित करने पर विचार मंथन

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