वर्तमान मुखिया हो कर भी नहीं लड़ सकेंगी चुनाव
अब 2022 में उसी जाति प्रमाणपत्र के अधार पर नामांकन करने पहुंची तो आर ओ सह अंचलाधिकारी अमृता कुमारी ने मायके के जाति प्रमाणपत्र को मान्यता देने से इनकार कर दिया. उससे ससुराल के पते पर जाति प्रमाण पत्र की मांगग की गई. सारोती मरांडी ने अखबार में छपे खबर के हवाले से कहा भी कि जो मुखिया जिस जाति प्रमाण पत्र पर पहले चुनाव लड़ चुके हैं, उनके लिए नया नियम बाधक नहीं है. परंतु अंचलाधिकारी ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई गाइडलाइन नहीं आया है.सुंदरी की भी वही कहानी, दोनों कोस रही सरकार को
जाति प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है. सारोती मारांडी झारखंड सरकार को कोसते हुए कह रही है कि इस गाइडलाइन पर तो झारखंड में रहनेवाले बहुत सारे आदिवासी चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे. दूसरा मामला नीमडंगाल कालीमाटी की सुन्दरी टुडू का है. उसका मायके बरबेंदिया मे है और दो वर्ष पहले उसकी शादी नीमडंगाल कालीमाटी में हुई है. उसके सारे कागजात मायके बरबेंदिया के हैं, उससे भी ससुराल नीमडंगाल कालीमाटी के कागजात मांगे गए, जो वह देने में असमर्थ है. सुन्दरी का कहना है कि पदाधिकारी कहते हैं कि ऑनलाइन कागजात बन जाएगा. परंतु कागजात नहीं बन रहा है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-the-principal-secretary-of-the-energy-department-will-be-given-electricity-missing-for-5-hours-in-10/">धनबाद: ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव को बिजली का ठेंगा, 10 में 5 घंटे गायब [wpse_comments_template]

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