140 करोड़ के ऑनरेरियम घोटाले में हुई कार्रवाई, डॉ पीके सिंह का आवास सील Dhanbad : सीबीआई की टीम ने सिंफर में हुए लगभग 140 करोड़ के ऑनरेरियम (प्रोत्साहन राशि) घोटाले को लेकर पहली बार सिंफर के पूर्व निदेशक डॉ प्रदीप कुमार सिंह और मुख्य वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार सिंह के आवास पर दबिश दी. 30 जून को सीबीआई की टीम ने धनबाद एवं डिगवाडीह में एक साथ अभियान शुरू किया. इसमें धीरेंद्रपुरम स्थित सत्यम शिवम सुंदरम अपार्टमेंट में डॉ प्रदीप कुमार सिंह के आवास को जांच के बाद सील कर दिया गया. वहीं सिंफर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार सिंह के डिगवाडीह स्थित आवास में भी सर्च अभियान चलाया गया. जांच में क्या-क्या मिला है, टीम कुछ भी नही बता रही है. कहा गया कि जांच के बाद स्पष्ट किया जाएगा.
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alt="" width="300" height="200" /> जांच के बाद मुख्य वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार सिंह के आवास से निकलती टीम.[/caption] बताते हैं कि पूर्व में डाॅअशोक कुमार सिंह के खिलाफ धनबाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्राथमिकी दर्ज की थी. सिंफर के पूर्व निदेशक पीके सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया. इन दोनों अफसरों के अलावा कई अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है. सीबीआई ने दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 से 28 मार्च 2021 के बीच कोल सैंपलिंग प्रोजेक्ट में नियम को ताक पर रख कर सिंफर के 553 वैज्ञानिकों, टेक्निकल ऑफिसर, टेक्निकल असिस्टेंट और प्रशासनिक कर्मचारियों को 139 करोड़ 79 लाख 97 हजार 871 रुपए का भुगतान किया गया. इसमें से डॉ पीके सिंह ने ऑनरेरियम के रूप में 15 करोड़ 36 लाख 72 हजार रुपए व डॉ अशोक को बौद्धिक शुल्क के रूप में नौ करोड़ चार लाख 31 हजार 337 रुपए लिए. इससे सरकार के खजाने को क्षति पहुंची। मुख्य वैज्ञानिक डॉ एके सिंह पर कोल सैम्पलिंग रिसर्च क्वालिटी एसेसमेंट विभाग के हेड के पद पर रहते हुए भी गड़बड़ी करने की शिकायत है. वर्ष 2021 से ही इस घोटाले की जांच चल रही थी। इसी मामले में पिछले साल रिटायरमेंट से पहले वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद( सीएसआईआर), नई दिल्ली ने डॉ पीके सिंह को सस्पेंड कर दिया था. दो वर्षों से कई केंद्रीय एजेंसियां मामले की जांच कर रही थी. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-maternal-uncles-appearance-in-ranjay-murder-case-instructions-to-the-prosecution-to-present-witnesses/">धनबाद:
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क्या है मामला
[caption id="attachment_684496" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="200" /> जांच के बाद मुख्य वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार सिंह के आवास से निकलती टीम.[/caption] बताते हैं कि पूर्व में डाॅअशोक कुमार सिंह के खिलाफ धनबाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्राथमिकी दर्ज की थी. सिंफर के पूर्व निदेशक पीके सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया. इन दोनों अफसरों के अलावा कई अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है. सीबीआई ने दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि वर्ष 2016 से 28 मार्च 2021 के बीच कोल सैंपलिंग प्रोजेक्ट में नियम को ताक पर रख कर सिंफर के 553 वैज्ञानिकों, टेक्निकल ऑफिसर, टेक्निकल असिस्टेंट और प्रशासनिक कर्मचारियों को 139 करोड़ 79 लाख 97 हजार 871 रुपए का भुगतान किया गया. इसमें से डॉ पीके सिंह ने ऑनरेरियम के रूप में 15 करोड़ 36 लाख 72 हजार रुपए व डॉ अशोक को बौद्धिक शुल्क के रूप में नौ करोड़ चार लाख 31 हजार 337 रुपए लिए. इससे सरकार के खजाने को क्षति पहुंची। मुख्य वैज्ञानिक डॉ एके सिंह पर कोल सैम्पलिंग रिसर्च क्वालिटी एसेसमेंट विभाग के हेड के पद पर रहते हुए भी गड़बड़ी करने की शिकायत है. वर्ष 2021 से ही इस घोटाले की जांच चल रही थी। इसी मामले में पिछले साल रिटायरमेंट से पहले वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद( सीएसआईआर), नई दिल्ली ने डॉ पीके सिंह को सस्पेंड कर दिया था. दो वर्षों से कई केंद्रीय एजेंसियां मामले की जांच कर रही थी. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-maternal-uncles-appearance-in-ranjay-murder-case-instructions-to-the-prosecution-to-present-witnesses/">धनबाद:
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