Gyan vardhan Mishra Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) 15 वर्ष बीत गये. न कोयला निकला, न अतिक्रमण हटा और न रेल सेवा ही बहाल हुई. चौंकिये नहीं, यह कड़वा सच उस झरिया शहर का है, जिसे नहीं उजड़ने देने के नाम पर राजनीतिज्ञ अब तक अपनी राजनीति की रोटी सेंकते रहे हैं. किस्सा झरिया-पाथरडीह रेल मार्ग के उस एग्रीमेंट का है, जो भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ( बीसीसीएल ) और रेल मंत्रालय के बीच हुआ था. एग्रीमेंट की अवधि सन 2022 में समाप्त हो चुकी है. परंतु सब जस का तस है. इस मुद्दे पर या तो सभी जानबूझ कर खामोश हैं या मामले से अनभिज्ञ. कुछ अनभिज्ञ होने का अभिनय करते भी देखे जा सकते हैं. चाहे वे इलाके के जनप्रतिनिधि हों या बीसीसीएल अथवा जिला प्रशासन के आला अफसरान. डेढ़ दशक से रेल बंदी का खामियाजा भुगत रही है जनता, जिसकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित हो रही है.
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alt="" width="300" height="138" /> झरिया स्टेशन, अब हो गया उजड़ा चमन[/caption] एग्रीमेंट पेपर पर बीसीसीएल के लोदना एरिया के चीफ जेनरल मैनेजर राकेश सिन्हा, धनबाद के मंडल रेल प्रबंधक के शुक्ल, पूर्व मध्य रेलवे ( धनबाद ) के वरीय मंडल अभियंता रवींद्रनाथ राय, लोदना क्षेत्र के एरिया मैनेजर (प्लानिंग) टीके बनर्जी सहित कई अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं. झारियावासियों के साथ कैसा छल किया गया, यह अब लोगों के जेहन में कौंध रहा है. वर्ष 2002 के जुलाई का महीना, जब नगर वासियों ने झरिया स्टेशन पर आखिरी सवारी गाड़ी का परिचालन होते देखा था. 2004 में झरिया-पाथरडीह रेल मार्ग पर मालगाड़ी समेत सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन बंद हो गया और इसी के साथ सबसे व्यस्ततम रेल मार्गो में शुमार झरिया का रेलवे स्टेशन अतीत के पन्नों मे सदैव के लिए समा गया.
फेल रहा रेलवे व बीसीसीएल का करार, बेकरार हो गए लोग
पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद-पाथरडीह रेल खंड के किमी 2 से किमी 12 तक अर्थात 10 किलोमीटर की लंबाई वाले रेल मार्ग को 15 वर्ष के लिए बीसीसीएल ने रेल मंत्रालय से साढ़े तीन करोड़ रुपये पर 15 वर्षों के लिये लीज पर लिया था. यह एग्रीमेंट 13 जून, 2007 को हुआ, जिसकी अवधि 12 जून 2022 को समाप्त हो गयी. एग्रीमेंट के मुताबिक बीसीसीएल रेलवे के उक्त भू भाग से कोयला की निकासी कर भूमिगत आग को बुझाने और जमीन का समतलीकरण कर रेलवे को जमीन वापस कर देने की बात हुई थी. मगर बातें हैं बातों का क्या. सब कुछ आज भी जस का तस है. न तो भूमिगत आग बुझाने की कोशिश हुई और न ही कोयले की निकासी. हां, रेल संपत्ति पर चोरों की नजर अवश्य गड़ी रही और बहुत हद तक ऐसे तत्व कामयाब भी रहे.अतीत के पन्नों में खो गया झरिया का रेलवे स्टेशन
[caption id="attachment_532173" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="138" /> झरिया स्टेशन, अब हो गया उजड़ा चमन[/caption] एग्रीमेंट पेपर पर बीसीसीएल के लोदना एरिया के चीफ जेनरल मैनेजर राकेश सिन्हा, धनबाद के मंडल रेल प्रबंधक के शुक्ल, पूर्व मध्य रेलवे ( धनबाद ) के वरीय मंडल अभियंता रवींद्रनाथ राय, लोदना क्षेत्र के एरिया मैनेजर (प्लानिंग) टीके बनर्जी सहित कई अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं. झारियावासियों के साथ कैसा छल किया गया, यह अब लोगों के जेहन में कौंध रहा है. वर्ष 2002 के जुलाई का महीना, जब नगर वासियों ने झरिया स्टेशन पर आखिरी सवारी गाड़ी का परिचालन होते देखा था. 2004 में झरिया-पाथरडीह रेल मार्ग पर मालगाड़ी समेत सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन बंद हो गया और इसी के साथ सबसे व्यस्ततम रेल मार्गो में शुमार झरिया का रेलवे स्टेशन अतीत के पन्नों मे सदैव के लिए समा गया.
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