सीओ और नाजिर पर लगाया बदसलूकी का आरोप
परंतु जब 8:00 बजे आरओ से मिले तो उन्होंने थोड़ी देर में करने की बात कही. वह लगातार पुनः मतगणना की मांग करते रहे और सीओ भी टालमटोल में लगे रहे. अंत में सीओ ऑफिस के नाजिर ने उनसे बदतमीजी की और बगैर पुनः मतगणना के यशोदा देवी को विजेता घोषित कर दिया गया. विरोध करने पर सीओ एवं नाजिर साहब ने उस आवेदन को रिजेक्ट कर दिया. बोले कि यह वार्ड संख्या 2,10 और 11 बड़ा पिछरी पंचायत के अंतर्गत नहीं आता है. उसके बाद मुझे, मेरे भाई और पिताजी को धक्का देकर निकाला गया. नाजिर साहब एवं सीओ साहब की बदतमीजी और अफसरशाही के कारण उनका परिवार काफी आहत है.2015 में यशोदा देवी मुखिया रहते हुई थी निलंबित
2015 के पंचायत चुनाव में यशोदा देवी विजेता रही थी. लेकिन मनरेगा में गड़बड़ी के आरोप में निलंबित हो चुकी थी. बावजूद वह चुनाव लड़ी, जबकि आदेश जारी हुआ था कि जो निलंबित हुआ है, वह मुखिया का चुनाव नहीं लड़ सकते. मुखिया प्रत्याशी ने उपायुक्त से पुनः मतगणना की मांग की है. अगर पुनः मतगणना नहीं हुई तो वह परिवार के साथ आत्महत्या कर लेंगे और उसके जिम्मेवार गोविंदपुर अंचल अधिकारी सह क्षेत्रीय अधिकारी होंगे. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-four-people-caught-stealing-in-balliapur-police-sent-to-jail/">धनबाद: बलियापुर में चोरी करते पकड़े गए चार लोग, पुलिस ने भेजा जेल [wpse_comments_template]

Leave a Comment