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धनबाद: लोको टैंक तालाब के सौदर्यीकरण पर निगम व रेलवे आमने सामने

 
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) माल महाराज का और मिर्जा खेले होली. नगर निगम इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है. वार्ड 26 के अंतर्गत वॉच एंड वार्ड कॉलोनी स्थित रेलवे के लोको टैंक तालाब का सौंदर्यीकरण होना है. तालाब, रेलवे के अधीन है और काम निगम करना चाहता है. इसे लेकर रेलवे के अधिकारी 15 शर्तो के साथ नगर निगम के अधिकारियों के साथ एकरारनामा चाहते हैं, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है. लेकिन इससे पहले ही निगम ने 14 फरवरी को इस तालाब का टेंडर करा लिया. अभी सीएस (कॉम्परेटिव शिड्यूल) का काम चल रहा है. साथ हीं टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संवेदक को काम सौंपने की भी बात कही जा रही है. हालांकि बगैर किसी सहमति के काम शुरू होने में अभी से संदेह है.

  स्वामित्व को लेकर रेलवे के अधिकारियों की है चिंता

नगर निगम और जिला परिषद की लड़ाई को देखते हुए रेलवे के अधिकारी फूंक फूंक कर कदम रखना चाहते हैं. रेलवे आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उन्हें इस बात की चिंता है कि कहीं जिला परिषद के अधीनस्थ बेकारबांध तालाब की तरह लोको टैंक तालाब भी हाथ से न निकल जाए. सौन्दर्यीकरण के बाद निगम अपना नियम कानून लागू करेगा और इससे होने वाली आमदनी अपने खाते में डालेगा. इसे देखते हुए अपने नियमों के अनुसार तालाब के सौन्दर्यकरण की जिम्मेवारी सौंपना चाहते है.

   निगम के अधिकारियों के हैं अपने तर्क

तालाब के सौदर्यीकरण को लेकर नगर निगम के अधिकारियों के अपने तर्क हैं. निगम के कार्यपालक अभियंता अनूप सामंता ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की सहभागिता से तालाब का सौंदर्यीकरण होना है. अमृत योजना की राशि इसपर खर्च होगी. इसमें निगम कोई मनमानी नहीं कर रहा है. सब कुछ सरकार के आदेश पर ही हो रहा है. फ़िलहाल रेलवे ने नोटिस दिया है, जिसमें 15 शर्तो के साथ एमओयू करने की बात कही गई है. उसका लिखित जबाब दिया जाएगा. कोई अड़चन वाली बात नहीं है. टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तालाब का काम शुरू होगा.

   वर्ष 1952 में अस्तित्व में आया था लोको टैंक तालाब

50 के दशक में रेलगाड़ी वाष्प इंजन से चलती थी. वाष्प बनाने के लिये इंजन में कोयले के साथ पानी का इस्तेमाल होता था. जानकार बताते हैं कि 22 एकड़ में फैला यह तालाब 1952 से लोको टैंक के नाम से जाना जाने लगा. रेल पटरी के किनारे तालाब होने के कारण इसी से इंजन में पानी भरा जाता था. बाद में इसके पानी का इस्तेमाल ट्रैन की बोगियों को धोने में होने लगा. बरसात और कॉलोनी के नाले का पानी इस तालाब में छोड़ा जाता है. कुछ लोग कपड़ा धोने और मवेशी धोने का काम भी इस तालाब में करते हैं. अभी रेलवे की ओर से तालाब की साफ सफाई का कोई इंतजाम नहीं है.

  रेलवे बोर्ड से मिली हुई है अनुमति

वार्ड 26 के पूर्व पार्षद निर्मल कुमार मुखर्जी ने बताया कि पर्यावरण और जल को बचाने के लिये केंद्र सरकार तालाब का सौन्दर्यीकरण करा रही है. रेलवे केंद्र से अलग नहीं है. तालाब को लेकर रेलवे बोर्ड भी आदेश जारी कर चुका है. लेकिन धनबाद रेल मंडल के अधिकारी बेकार का अड़चन डाल रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री सहित अन्य विभागों को लेटर दिया है. रेलवे को अपना हठ छोड़ना ही होगा. [wpse_comments_template]
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