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धनबाद: झमाडा आश्रितों की गिरफ्तारी पर अड़े निगम कर्मी, तीसरे दिन भी दिया धरना

  Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)  नगर निगम और झमाडा के मृत कर्मियों के आश्रितों की लड़ाई हर दिन नया मोड़ ले रही है और आम आदमी मुफ्त में पिस रहा है. पूरा शहर कचरों के टीले में तब्दील होने लगा है. अब तो आम आदमी के साथ मजदूर यूनियन के नेता भी नगर आयुक्त सह एमडी को कटघरे में खड़ा करने लगे हैं. नगर आयुक्त के समर्थन में तीसरे दिन यानी शुक्रवार को भी निगम कर्मियों का धरना जारी रहा.  सफाई सहित निगम कार्यालय का सारा कामकाज ठप रहा. झमाडा कार्यालय के बाहर 354 दिन से धरना दे रहे झमाडा कर्मियों आश्रितों को पुलिस नोटिस देने पहुंची. नोटिस मिलने के बाद कर्मी खुद को निर्दोष बता रहे थे.

  नगर आयुक्त पर 250 करोड़ के घोटाले का आरोप

[caption id="attachment_551081" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/ganes-divan-300x183.jpeg"

alt="" width="300" height="183" /> आश्रितों के धरना में शामिल गणेश दिवान वर्मा[/caption] झमाडा कर्मियों के आश्रितों के धरना को समर्थन देने पहुंचे लोकल बॉडीज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री गणेश दिवान वर्मा ने कहा कि यह नगर आयुक्त है या धनबाद का मेयर, जो तानाशाही कर रहे हैं. उन्होंने 250 करोड़ का वित्तीय घोटाला किया है. सफाई पर हर माह करोडों रूपये खर्च करते हैं, लेकिन सफाई कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं देते हैं. मजदूरों के पैसे का बंदरबांट होता है. निगम पब्लिक ऑफिस है.  यहां कोई भी अपने काम को लेकर जा सकता है.  लेकिन नगर आयुक्त न आम लोगों की समस्या सुनते हैं और न ही यूनियन के किसी व्यक्ति से मिलना चाहते हैं. खुद झमाडा के आश्रितों को अपने गुंडों से पिटवाते हैं और मुकदमा भी दर्ज कराते हैं. पुलिस और प्रशासन की भी मिली भगत है, तभी तो सिर्फ झमाडा के आश्रितों को नोटिस थमाया जा रहा है.  इधर धरणर्थियों की पुलिस एक नहीं सुन रही है. यह सरासर अन्याय है, हमारी लड़ाई जारी रहेगी.

  झमाडा कर्मियों के आश्रितों ने खुद को बताया निर्दोष

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झमाडा कर्मियों को नोटिस देती पुलिस[/caption] सदर थाने की पुलिस ने शुक्रवार को झमाडा कार्यालय के बाहर धरना दे रहे 20 नामजद आरोपियों को नोटिस थमाया. उन पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और निगम कर्मियों पर जानलेवा हमला करने का आरोप है. सात दिन के अंदर न्यायायल में अपना पक्ष रखने की बात नोटिस में कही गई है. इस संबंध में धरना पर बैठे एक आरोपी अजहर खान ने कहा कि हमें मारपीट करना होता तो 354 दिन से धरना क्यों देते. निगम के लोगों ने हमें पीटा, ऊपर से केस भी कर दिया. हमलोग शांतिपूर्ण तरीके से 7 फरवरी को धरना दे रहे थे और एमडी के समक्ष अपनी बात रखना चाह रहे थे.  बावजूद हमें दोषी बनाया जा रहा है. हम जेल जाएंगे, पर तब तक धरना से नहीं हटेंगे,जब तक अनुकंपा पर हमें नौकरी नहीं मिल जाती.

  गिरफ्तारी तक जारी रहेगा धरना

निगम कर्मियों ने कहा कि पुलिस ने हमारी मदद नहीं की. इसलिये हमलोग धरना पर बैठे हैं.  जब तक सभी नामजद लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, धरना जारी रहेगा. हमारे साहेब (नगर आयुक्त) का कोई कॉलर पकड़ेगा तो हम छोड़ देंगे, ये धरनार्थी नहीं हैं, इनकी गिरफ्तारी हर हाल में होनी चाहिए.  नोटिस देने से क्या होगा. [wpse_comments_template]

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