Dhanbad/Nirsa : रमजान के आखिरी जुमे पर शुक्रवार 21 अप्रैल को धनबाद (Dhanbad) शहर और कस्बाई इलाके के मस्जिदों में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी. लोगों ने नमाज अदाकर अल्लाह से अमन-चैन व सलामती की दुआ मांगी. झुलसा देने वाली गर्मी में रोजेदार दोपहर में नया बाजार ईदगाह, हैदरी मस्जिद, मनाइटांड़ मस्जिद, नूरी मस्जिद वासेपुर, अब्दुल जब्बार बड़ी मस्जिद वासेपुर, शमशेर नगर ईदगाह, जामा मस्जिद पुराना बाजार सहित अन्य मस्जिदों व ईदगाहों में पहुंचकर नमाज अदा की पुराना बाजार स्थित जामा मस्जिद के इमाम मोहहमद निजामुद्दीन ने कहा कि माहे रमजान बरकत का महीना है. जो रोजेदार अल्लाह की इबादत करता है अल्लाह भी उसकी दुआ जरूर कुबूल करते हैं. इस्लाम धर्म में शुक्रवार के दिन को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है शुक्रवार यानी जुमे के दिन नमाज पढ़ने से अल्लाह मन की हर मुराद पूरी करते हैं. जुमे के दिन ही हजरत आदम अलैहिस्सलम को जन्नत से दुनिया में भेजा गया था और जुमे को ही उन्होंने जन्नत में वापसी की थी. जुमे की नमाज अदा करने से पापों से मुक्ति मिलती है. उन्होंने तमाम मुस्लिम भाइयों से हंसी-खुशी व शांतिपूर्ण तरीके से ईद मनाने की अपील की.
निरसा के मस्जिदों में पढ़ी गई अलविदा जुमे की नमाज
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निरसा बाजार स्थित मस्जिद में नमाज अदा पढ़ते लोग[/caption]
निरसा : अलविदा जुमे की नमाज को लेकर निरसा बाजार समेत आसपास के मस्जिदों में नमाजियों की काफी भीड़ रही. लोगों ने इकट्ठा होकर नमाज अदा की और अमन-चैन की दुआ मांगी. कुमारधुबी शिवलबाड़ी बड़ी मस्जिद के मौलाना मसूद अजहर ने बताया कि अलविदा जुमे की नमाज का काफी महत्व है. मान्यता के मुताबिक एक जुम्मे की नमाज अदा करने से 40 नमाज अदा करने का सबाब मिलता है. अलविदा जुमा की नमाज अदा करने से अल्लाह हर गुनाह को माफ कर देता है. यह भी पढ़ें :
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